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25 नवंबर, 2020|10:48|IST

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गुमला में सिसई रोड छठ तालाब में व्रती प्रदूषित जल से अर्घ्य देने को होंगे विवश

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लोक आस्था का चार दिनी महापर्व छठ पूजा महोत्सव में महज कुछ ही दिन शेष रह गए है। बावजूद इसके जिले के छठ घाटो की अब तक साफ सफाई शुरू नहीं हो सकी है। जिला मुख्यालय के सिसई रोड तालाब यहां का सबसे पुराना छठ घाट है। तालाब में कचरे की भरमार है,वही पानी गहरे हरे रंग को हो गया है। इतना ही पानी से दुर्गंध भी आ रही है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि गुमला के सबसे पुराने छठ घाट की दुर्दशा क्या हो गई है। लंबे समय से सिसई रोड छठ तालाब को बेहतर बनाने की बात प्रशासनिक महकमे होती रही है, मगर नतीजा ढाक के तीन पात रहे। तालाब में कुछ ब्लीचिंग और कुछ बोरे चुना डाल कर नगर परिषद और जिला प्रशासन साफ-सफाई करने का खाना पूर्ति कर लेता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही होगा,तो यह हैरानी की कोई बात नही होगी। सिसई रोड तालाब की स्थिति देखने से एक बात तो साफ है कि इस बार भी यहां छठ पूजा के दौरान व्रत करने वाले छठव्रती प्रदूषित जल से ही भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करने और अनुष्ठान करने को विवश होंगे। हालांकि स्थानीय युवा और श्रद्धालु अपने स्तर से भी छठ घाट की साफ सफाई करते हैं। लेकिन सिसई रोड छठ तालाब अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। कई बड़े नाले इसमें में गिराये हैं,जो जिससे इसके पानी के ठीक करना फिलहाल प्रशासन के बूते की बात नही है।

नागफेनी स्थित कोयल नदी प्रमुख छठ घाट के रूप में उभरा :

आदिवासी बहुल गुमला में भी अब छठ पूजा महोत्सव बड़े पैमाने पर आयोजित होने लगी है।आज कुछ वर्ष पूर्व तक जिला मुख्यालय के सिसई रोड छठ तालाब में चंद परिवार ही छठ पूजा करते थे,लेकिन पिछले कुछेक वर्षों के दौरान यहां छठ पूजा करने वाले श्रदद्धालुओं की संख्या बड़ी तेजी से बड़ी है। वहीं सिसई रोड तालाब के पानी प्रदूषित होने के कारण जिला मुख्यालय से करीब 20 किमी दूर सिसई प्रखंड क्षेत्र के नागफेनी में बहने वाली कोयल नदी प्रमुख छठ घाट के रूप में उभर कर सामने आई है। गुमला शहर के बड़ी संख्या में छठव्रती यहां पहुंते हैं।

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  • Web Title:Sisai Road in Gumla will be forced to pay for the fast from polluted water in Chhath pond