
ओल्हेपाठ में प्रस्तावित कोल वाशरी के विरोध में आदिवासी रैयतों का हल्ला बोल
लातेहार के बालूमाथ प्रखंड के ओल्हेपाठ में स्थानीय रैयतों और आदिवासी समाज ने फर्जी जमीन कागजात के आधार पर कोल वाशरी खोले जाने के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने अपनी पुश्तैनी जमीन की रक्षा के लिए पूजा-अर्चना कर सरना झंडा स्थापित किया और कहा कि वे अपने पूर्वजों की जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।
लातेहार,संवाददाता। बालूमाथ प्रखंड के ओल्हेपाठ में फर्जी जमीन कागजात के आधार पर प्रस्तावित कोल वाशरी खोले जाने के खिलाफ स्थानीय रैयतों एवं आदिवासी समाज के लोगों ने गुरुवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण एकजुट होकर मेसर्स ओमकार कॉल वाशरीज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने अपने पुश्तैनी जमीन की रक्षा के लिए पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सरना झंडा स्थापित किया और स्पष्ट कहा कि वे अपने पूर्वजों की बचाई हुई जमीन किसी भी कीमत पर कंपनी के हाथों नहीं जाने देंगे। मौके पर आजसू पार्टी के जिला अध्यक्ष अमित पांडे, उप प्रमुख विजय उरांव, प्रखंड अध्यक्ष शंकर उरांव सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

जिला अध्यक्ष अमित पांडे ने कहा कि कंपनी फर्जी तरीके से ग्रामीणों की जमीन का अधिग्रहण करना चाहती है, जो आजसू पार्टी किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि जब जमीन से जुड़ा मामला कोर्ट में विचाराधीन है। तब कंपनी द्वारा अधिग्रहण की कोशिश गंभीर सवाल खड़े करती है। उन्होंने बताया कि आदिवासी समाज ने इस संबंध में उपायुक्त को लिखित आवेदन भी दिया था। इसके बावजूद कंपनी द्वारा जमीन हथियाने की कोशिश निंदनीय है। आजसू पार्टी ग्रामीणों के साथ खड़ी है और उनके जमीन अधिकार की लड़ाई सड़क से लेकर राजधानी तक लड़ेगी। उप प्रमुख विजय उरांव ने कहा कि कंपनी फर्जी जनसुनवाई कर आदिवासियों के हक-अधिकार का हनन कर रही है। जिन जमीन पर कंपनी कब्जा करना चाहती है। उसी पर आदिवासी समाज पीढ़ियों से खेती-बाड़ी कर जीवनयापन कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कंपनी दोबारा पहुंची तो ग्रामीण उसे खदेड़ने में भी पीछे नहीं हटेंगे। प्रखंड अध्यक्ष शंकर उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए हमेशा संघर्षरत रहा है। ग्रामीण महिला सीता देवी ने कहा कि जिस जमीन पर कंपनी वाशरी खोलना चाहती है। वह मामला अभी कोर्ट में लंबित है। इसके बावजूद फर्जी तरीके से जनसुनवाई कर जमीन लेने की कोशिश आदिवासी समाज के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर महिलाएं भी जिला मुख्यालय जाकर धरना-प्रदर्शन करने को तैयार हैं। मौके पर शंकर उरांव, वीरेंद्र उरांव, रामकृष्ण उरांव, राजेश उरांव, निरंजन उरांव, राम गोविंद उरांव सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण मौजूद रहे।

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