पालकोट अभयारण्य के इको सेंसिटिव जोन विस्तार को रद्द करने की मांग, सांसद को सौंपा ज्ञापन

हिन्दुस्तान, गुमला
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गुमला संवाददाता। पालकोट वन्यजीव अभयारण्य के इको सेंसिटिव जोन के विस्तार को लेकर विरोध तेज हो गया है। जिला परिषद के पूर्व सदस्य चैतु उरांव ने लोहरदगा संसदीय क्षेत्र के सांसद को ज्ञापन सौंपकर भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 21 फरवरी 2018 की अधिसूचना को रद्द कराने की मांग की है।

पालकोट अभयारण्य के इको सेंसिटिव जोन विस्तार को रद्द करने की मांग, सांसद को सौंपा ज्ञापन

गुमला संवाददाता। पालकोट वन्यजीव अभयारण्य के इको सेंसिटिव जोन के विस्तार को लेकर विरोध तेज हो गया है। जिला परिषद के पूर्व सदस्य चैतु उरांव ने लोहरदगा संसदीय क्षेत्र के सांसद को ज्ञापन सौंपकर भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 21 फरवरी 2018 की अधिसूचना को रद्द कराने की मांग की है।

विरोधप्रद आवाज

बिहार सरकार द्वारा 22 मार्च 1990 को पालकोट वन्यजीव अभयारण्य अधिसूचित किया गया था। बाद में केंद्र सरकार की अधिसूचना के माध्यम से इसका विस्तार करते हुए सिमडेगा जिले के 33 तथा गुमला जिले के 173 राजस्व गांवों को इको सेंसिटिव जोन में शामिल कर दिया गया।

स्थानीय आम जनता की आवाज

अधिसूचना जारी करने से पूर्व ग्रामसभा, पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद की सहमति नहीं ली गई, जबकि यह क्षेत्र पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है।

संदेह उठाए गए मुद्दे

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के अधिकांश लोग आदिवासी एवं मूलवासी हैं, जिनका जीवन-यापन खेती और वनों पर निर्भर है।

समक्ष उठाए गए मुद्दे

ऐसे में स्थानीय समुदायों से राय लिए बिना अधिसूचना लागू करना उनके अधिकारों की अनदेखी है।

विकास कार्यों का प्रभाव

अधिसूचना का प्रारूप आम जनता के बीच नहीं रखा गया, जिससे लोगों को इसके लाभ-हानि की जानकारी नहीं मिल सकी। इको सेंसिटिव जोन के विस्तार के बाद क्षेत्र में सड़क, जल संसाधन, लघु खनिज, लघु वनोपज और उद्योग-धंधों से जुड़े विकास कार्य प्रभावित हुए हैं।

समक्ष की मांग

सांसद से आग्रह किया गया है कि अधिसूचना का गहन अध्ययन कर क्षेत्र के आदिवासियों एवं मूल निवासियों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार के समक्ष मामला उठाएं तथा विकास कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर कराने की पहल करें।

प्रश्न और उत्तर

किसने पालकोट वन्यजीव अभयारण्य के इको सेंसिटिव जोन के विस्तार का विरोध किया है?
जिला परिषद के पूर्व सदस्य चैतु उरांव ने लोहरदगा संसदीय क्षेत्र के सांसद को ज्ञापन सौंपकर भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 21 फरवरी 2018 की अधिसूचना को रद्द कराने की मांग की है।
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