जिले के 10 कस्तूरबा विद्यालयों में करीब चार हजार छात्राएं कर रही हैं अध्ययन
जिले के 10 कस्तूरबा विद्यालयों में करीब चार हजार छात्राएं कर रही हैं अध्ययन जिले के 10 कस्तूरबा विद्यालयों में करीब चार हजार छात्राएं कर रही हैं अध्यय

गुमला प्रतिनिधि कई जिलों में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में छात्राओं को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने की खबरों के बीच गुमला जिले की तस्वीर राहत देने वाली है। जिले में संचालित 10 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों की पड़ताल में अधिकांश विद्यालयों में छात्राओं के लिए भोजन, पेयजल, बिजली और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं संतोषजनक मिलीं। इन विद्यालयों में वर्तमान में करीब चार हजार छात्राएं अध्ययनरत हैं।
शिक्षा की स्थिति
जिले के सभी कस्तूरबा विद्यालयों में कक्षा छह से दसवीं तक पढ़ाई होती है, जबकि जिला मुख्यालय स्थित विद्यालय में इंटरमीडिएट तक की शिक्षा भी उपलब्ध कराई जा रही है। छात्रावासों में वार्डन की देखरेख में छात्राओं की दिनचर्या संचालित होती है और उनकी सुरक्षा व सुविधाओं पर नियमित निगरानी रखी जाती है।
बुनियादी सुविधाएं
पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि अधिकांश विद्यालयों में भोजन निर्धारित मानकों के अनुरूप उपलब्ध कराया जा रहा है। पेयजल और शौचालय की व्यवस्था भी सामान्य रूप से बेहतर है। विद्यालय प्रबंधन छात्राओं की पढ़ाई के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और रहन-सहन पर भी लगातार ध्यान दे रहा है। हालांकि कुछ विद्यालयों में भवनों के रखरखाव, रंग-रोगन, छोटी-मोटी मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता महसूस की गई। बदलते समय के साथ छात्राओं को और बेहतर एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए इन क्षेत्रों में लगातार निवेश और निगरानी जरूरी है।
स्कूल व्यवस्थाएं
जिला मुख्यालय स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की वार्डन ऊषा रानी कुजूर ने बताया कि विद्यालय में भोजन, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जाती है तथा छात्राओं को तय मानकों के अनुरूप सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कस्तूरबा विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर विद्यालयों का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।
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गुमला में अपार आईडी बनाने की रफ्तार सुस्त, महज 30 फीसदी बच्चों के पास है अपार आईडी
1.81 लाख विद्यार्थियों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक सिर्फ 53,565 की ही बनी अपार आईडी
दस्तावेजों की त्रुटि, तकनीकी दिक्कत और जागरूकता की कमी बनी बड़ी बाधा
गुमला प्रतिनिधि। जिले में विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाने की रफ्तार काफी धीमी है। सरकार ने अपार आईडी बनाने की अंतिम तिथि 30 जून निर्धारित की है, लेकिन समय सीमा समाप्त होने में महज कुछ दिन शेष रहने के बावजूद जिले के हजारों विद्यार्थी अब भी इससे वंचित हैं। इससे शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ गई है। जिले में करीब एक लाख 81 हजार विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके मुकाबले अब तक केवल 53 हजार 565 विद्यार्थियों की ही आईडी बन सकी है। यानी लक्ष्य का करीब 30 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है, जबकि लगभग 1.27 लाख विद्यार्थियों की आईडी अभी बननी बाकी है।
अपार आईडी की भूमिका
अपार आईडी विद्यार्थियों के लिए 12 अंकों की डिजिटल पहचान होगी, जो भविष्य में उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड का स्थायी डिजिटल दस्तावेज बनेगी। आने वाले समय में बोर्ड परीक्षाओं, छात्रवृत्ति योजनाओं और उच्च शिक्षा में नामांकन के दौरान इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके माध्यम से विद्यार्थियों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहेगा।
अवरोध और समाधान
शिक्षा विभाग के अनुसार अपार आईडी बनाने में कई तरह की बाधाएं सामने आ रही हैं। अभिभावकों में जागरूकता की कमी, पोर्टल पर तकनीकी समस्याएं, सर्वर की धीमी गति तथा आधार और अन्य दस्तावेजों में नाम, जन्मतिथि या अन्य विवरण की त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में आवेदन निरस्त हो रहे हैं। जिला शिक्षा अधीक्षक नूर आलम खान ने बताया कि विभाग विद्यालयों के माध्यम से तेजी से अपार आईडी बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों के दस्तावेजों में त्रुटियां जल्द ठीक कराकर विद्यालय से संपर्क करें, ताकि निर्धारित समय के भीतर अधिक से अधिक विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाई जा सके।


