
गुमला ब्लड बैंक का सेंट्रल टीम ने किया निरीक्षण,जल्द मिलेगा नया लाइसेंस
गुमला ब्लड बैंक को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की घटना के बाद 30 अक्टूबर को बंद कर दिया गया था। 12 दिन बाद अधिकारियों ने बैंक का निरीक्षण किया और उसकी व्यवस्था, सुरक्षा मानक और रिकॉर्ड की जांच की। अब गुमला ब्लड बैंक को ब्लड स्टोरेज यूनिट के रूप में कार्य करने की अनुमति दी गई है।
गुमला, प्रतिनिधि। चाईबासा ब्लड बैंक में एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की घटना के बाद एहतियातन 30 अक्टूबर को गुमला ब्लड बैंक का संचालन लाइसेंस नहीं होने के कारण बंद कर दिया गया था। करीब 12 दिन बाद बुधवार को सेंट्रल से एडीसी अफसर मुनीश ककड़ व जिला डीआई पूनम तिर्की की टीम गुमला ब्लड बैंक के निरीक्षण के लिए पहुंची। निरीक्षण के दौरान टीम ने ब्लड बैंक की व्यवस्था, रिकॉर्ड, सुरक्षा मानक और भवन की संरचना का बारीकी से जायजा लिया। साथ ही आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए जल्द ही ब्लड बैंक को नया लाइसेंस निर्गत करने की बात कही। अधिकारियों ने फिलहाल गुमला ब्लड बैंक को ब्लड स्टोरेज यूनिट के रूप में कार्य करने की अनुमति दी है।

अब रांची से जांचित ब्लड गुमला में स्टोर कर जरूरतमंद मरीजों को उपलब्ध कराया जा सकेगा। गुमला ब्लड बैंक पुराने भवन से स्थानांतरित होकर 2016 में नए भवन में कार्यरत है। अब नए भवन के लिए लाइसेंस प्रक्रिया शुरू हो चुकी है,जो शीघ्र पूरी होने की उम्मीद है। जिले में एकमात्र यही ब्लड बैंक है। जिसकी स्थापना 19 मार्च 2008 को की गई थी। जिले में प्रतिमाह लगभग 700 से 800 यूनिट रक्त की जरूरत होती है। जिसकी पूर्ति ब्लड डोनेशन कैंप और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से की जाती है।निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन डॉ. शंभु सिंह, सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अनुपम कुमार, ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. सुनील राम सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे।

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