
स्कूल में चाहिए गर्ल्स टॉयलेट
छात्राओं के मां-बापने खोला सिस्टम का सच,बोले छात्राओं के मां-बापने खोला सिस्टम का सच,बोलेछात्राओं के मां-बापने खोला सिस्टम का सच,बोलेछात्राओं के मां-ब
गुमला संवाददाता बेटी पढ़ाओ का संदेश हर मंच से दिया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी बेटियों के रास्ते में दीवार बनकर खड़ी है। स्कूल में चाहिए गर्ल्स अभियान के सातवें दिन हिंदुस्तान की टीम ने छात्राओं की मां और अभिभावकों से संवाद किया। बातचीत में जो तस्वीर सामने आई, वह शिक्षा व्यवस्था के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अभिभावकों ने साफ कहा कि जब स्कूल में शौचालय और पानी जैसी बुनियादी सुविधा नहीं होगी, तो बच्चियों को नियमित स्कूल भेजना मुश्किल हो जाता है।जिले में कुल 1331 स्कूल संचालित हैं। इनमें 31 स्कूल ऐसे हैं जहां गर्ल्स टॉयलेट की व्यवस्था ही नहीं है।
वहीं 40 स्कूलों में ब्वायज टॉयलेट नहीं हैं और 50 स्कूलों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके अलावे बड़ी संख्या में स्कूलों के शौचालय रख-रखाव और साफ-सफाई के अभाव में उपयोग के लायक नहीं बचे हैं। इन परिस्थितियों का सीधा असर छात्राओं की उपस्थिति और पढ़ाई पर पड़ रहा है। संवाद के दौरान कई माताओं ने बताया कि उनकी बेटियां स्कूल में शौचालय न होने या गंदगी के कारण दिनभर असहज रहती हैं। कुछ स्कूलों में छात्राएं खुले में जाने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें शर्मिंदगी और असुरक्षा का डर सताता है। अभिभावकों का कहना है कि किशोरावस्था में बच्चियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय बेहद जरूरी है,लेकिन स्कूलों में यह सुविधा नदारद है।अभियान के तहत सामने आई यह सच्चाई बताती है कि केवल नामांकन बढ़ाने से शिक्षा मजबूत नहीं होती, बल्कि स्कूल का माहौल भी छात्राओं के अनुकूल होना चाहिए। मां-बाप का कहना है कि सरकार अगर सचमुच बेटियों की पढ़ाई बचाना चाहती है, तो सबसे पहले स्कूलों में शौचालय, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त करनी होगी।जिले के स्कूलों की यह स्थिति न सिर्फ प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि योजनाओं और जमीनी क्रियान्वयन के बीच अब भी बड़ा फासला है। सवाल यह है कि क्या बेटियों की शिक्षा को सच में प्राथमिकता मिलेगी,या वे अब भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में स्कूल से दूर होती रहेंगी? ........ फोटो 1 ओलिभा कांता कुजूर विद्यालय में शौचालय की जर्जर स्थिति को लेकर वे काफी चिंतित हैं। इस वजह से छात्र-छात्राओं को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ बुनियादी सुविधाएं जरूरी हैं। विभाग को इस समस्या पर संज्ञान लेकर शीघ्र शौचालय का निर्माण कराना चाहिए। ओलिभा कांता कुजूर ........... फोटो 2 कमला देवी विद्यालय में शौचालय निष्क्रिय रहने के कारण बच्चों को बाहर शौच के लिए जाना पड़ता है। इस स्थिति को लेकर अभिभावक हमेशा चिंतित रहते हैं। उन्होंने कहा कि खुले में जाने से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है और किसी अप्रिय घटना की आशंका रहती है। विभाग को इसे गंभीरता से लेकर जल्द समाधान करना चाहिए। कमला देवी .......... फोटो 3 रूईदन नगेसिया। विद्यालय में शौचालय निष्क्रिय रहने की सूचना विभाग को पहले ही दी जा चुकी है। इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बच्चों को बाहर शौच के लिए जाना पड़ता है, जिससे अभिभावक चिंतित रहते हैं। विभाग को जल्द ठोस कदम उठाना चाहिए ताकि बच्चों को राहत मिल सके। रूईदन नगेसिया ........ फोटो 4 सुरेश नगेसिया वे अपने बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं, लेकिन शौचालय की व्यवस्था न होने से उन्हें हमेशा चिंता बनी रहती है। बच्चों को खुले में जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जो सुरक्षित नहीं है। उन्होंने विभाग से मांग की कि जल्द से जल्द शौचालय का निर्माण कराया जाए ताकि छात्र-छात्राओं को बाहर न जाना पड़े। सुरेश नगेसिया ........ फोटो 5राहुल लोहरा वे अपने बच्चों को संस्कारयुक्त शिक्षा के लिए नियमित रूप से विद्यालय भेजते हैं,लेकिन शौचालय की सुविधा न होना गंभीर चिंता का विषय है। इससे बच्चों को असुविधा होती है और अभिभावकों को डर बना रहता है। उन्होंने विभाग से आग्रह किया कि इस समस्या पर ठोस निर्णय लेकर शीघ्र शौचालय का निर्माण कराया जाए। राहुल लोहरा ......... फोटो 6 सीताराम नगेशिया विद्यालय में शौचालय नहीं होने से अभिभावकों को काफी चिंता रहती है। बच्चों के लिए स्कूल में शौचालय का होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस कमी के कारण बच्चों को कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। विभाग को इस दिशा में गंभीर पहल करते हुए शौचालय निर्माण की व्यवस्था करनी चाहिए। सीताराम नगेशिया ....... फोटो 7 फूलमईत नगेसिया विद्यालय में शौचालय का न होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। वे बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल जरूर भेजते हैं, लेकिन शौचालय न होने के कारण हमेशा चिंता बनी रहती है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय बुकमा में शीघ्र शौचालय का निर्माण कराया जाए। फूलमईत नगेसिया ........ फोटो 8 दीपक खलखो विद्यालय में शौचालय का निर्माण तो हुआ है, लेकिन वह अत्यंत घटिया स्तर का है। जिसके कारण बच्चे उसका उपयोग नहीं करते। उन्होंने कहा कि यह स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है। वे इस मामले को विभागीय स्तर पर उठाएंगे और जल्द से जल्द नए व गुणवत्तापूर्ण शौचालय निर्माण की मांग करेंगे। दीपक खलखो ........ फोटो 9 सेवाती देवी विद्यालय में शौचालय का अभाव दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। इससे बच्चों को परेशानी होती है और उनकी सुरक्षा पर भी असर पड़ता है। उन्होंने विभाग से मांग की कि जल्द से जल्द शौचालय का निर्माण कराया जाए, ताकि छात्र-छात्राएं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सुलभ और सुरक्षित शौचालय का उपयोग कर सकें। सेवाती देवी

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




