
प्रोजेक्ट द्वार से विकास कागज पर नहीं,बल्कि धरातल पर दिखाई देगा: प्रेरणा दीक्षित
गुमला जिले के बलातूपाठ गांव में डीसी प्रेरणा दीक्षित ने सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दौरा किया। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा से संबंधित कई समस्याओं का समाधान किया गया। प्रोजेक्ट द्वार के तहत गांवों में विकास सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
गुमला, संवाददाता। जिले के सुदूर पाट और दुर्गम इलाकों में सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किए गए प्रोजेक्ट द्वार अभियान के तहत डीसी प्रेरणा दीक्षित लगातार गांवों का दौरा कर रही हैं। बुधवार को उन्होंने विशुनपुर प्रखंड के बलातूपाठ गांव का दौरा किया। जो हेलता पंचायत से लगभग सात किमी पैदल दूरी पर स्थित है। डीसी ने पथरीले व कठिन रास्ते से होकर गांव पहुंच कर ग्रामीणों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं प्रत्यक्ष रूप से जानीं। बलातूपाठ गांव में लगभग 400 की आबादी है। जिनमें 150 से अधिक विलुप्त प्राय असूर और 250 उरांव जनजाति के लोग रहते हैं।

डीसी ने घर-घर जाकर ग्रामीणों से संवाद किया। ग्रामीणों ने सड़क,बिजली,स्वास्थ्य सेवा, विद्यालय भवन और आंगनवाड़ी केंद्र से संबंधित समस्याएं बताईं। ग्रामीणों से बातचीत के दौरान डीसी ने बताया कि बलातूपाठ तक सड़क निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है और शीघ्र ही निर्माण कार्य शुरू होगा। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय भवन का निरीक्षण किया और खराब स्थिति देखते हुए तत्काल मरम्मत का निर्देश दिया। साथ ही शिक्षक को गुणवत्ता आधारित प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया। आंगनवाड़ी भवन निर्माण का प्रस्ताव स्वीकृत होने की जानकारी ग्रामीणों को दी गई। स्वास्थ्य सुविधा मजबूत करने के लिए डीसी ने एएनएम का तबादला कर नए एएनएम को नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए गांव भेजने का आदेश दिया।ग्रामीणों के निष्क्रिय बैंक खातों की समस्या पर डीसी ने विशुनपुर बीडीओ को शुक्रवार तक सभी खातों को सक्रिय कर देने का निर्देश दिया। डीसी के निर्देश पर आज बलातूपाठ में प्रशासनिक शिविर भी आयोजित किया गया। जिसमें लोगों को कई योजनाओं का लाभ ऑन-द-स्पॉट मिला। शिविर में स्वास्थ्य जांच के साथ आधार,आयुष्मान, राशन कार्ड आदि दस्तावेजों का निर्माण व नवीनीकरण हुआ। सावित्रीबाई फुले किशोरी योजना के तहत आठ छात्राओं, मातृ वंदना योजना के तहत एक लाभार्थी और दिव्यांगजन योजना के तहत दो लोगों को लाभ प्रदान किया गया।पेंशन योजना में आठ नागरिकों को चयनित किया गया, 25 कंबल वितरित हुए, 27 जन्म प्रमाण पत्र और एक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया। अंचल कार्यालय संबंधित 32 मामलों का तत्काल निस्तारण किया गया। धोती-साड़ी योजना के पांच लाभुक, उज्ज्वला योजना के चार लाभार्थी और श्रम कार्ड के लिए 20 लोगों का चयन किया गया। कृषि विभाग ने 40 किसानों को लाभ दिया, वहीं जेएसएलपीएस द्वारा सीसीएफ समूह को 12 लाख रुपये का चेक दिया गया। डीसी बताया कि प्रोजेक्ट द्वार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास कागज पर नहीं,बल्कि गांव-गांव में धरातल पर दिखाई दे। आने वाले दिनों में अन्य पाट क्षेत्रों का भी नियमित भ्रमण किया जाएगा। बलातूपाठ गांव जिले के सबसे दुर्गम पाट क्षेत्रों में से एक है। जहां पहुंचने के लिए सात किमी का उबड़-खाबड़ पैदल रास्ता तय करना पड़ता है। गांव का सामाजिक ताना-बाना पारंपरिक संस्कृति और प्रकृति पर आधारित है,लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण यहां के लोग कई कठिनाइयों का सामना करते हैं। पक्की सड़क,नियमित स्वास्थ्य सेवाओं, बैंकिंग सुविधाओं और विश्वसनीय संचार माध्यमों का अभाव ग्रामीणों के जीवन को प्रभावित करता है। दुर्गम क्षेत्रों में पोषण स्तर सुधारने और महिलाओं के स्वास्थ्य को मजबूत करने के उद्देश्य से डीसी प्रेरणा दीक्षित ने विशेष पहल की है। उद्यान विभाग की ओर से 20 सहजन पौधों का वितरण किया गया। डीसी ने स्वंय पौधरोपण कर महिलाओं को इसके सेवन से मिलने वाले लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सहजन आयरन,विटामिन और सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होता है,जो एनीमिया और कमजोरी जैसी समस्याओं में प्रभावी है। डीसी ने महिलाओं को प्रतिदिन सहजन साग और फल को अपने भोजन में शामिल करने के लिए प्रेरित किया।

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