हाथियों के सामने जान जोखिम में डाल रहे ग्रामीण

Jan 31, 2026 11:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गुमला
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दुम्बो पंचायत क्षेत्र में 16 जंगली हाथियों के प्रवेश से ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीण जानबूझकर हाथियों को उकसा रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। प्रशासन ने धारा 163 लागू की है, लेकिन लोग इसकी अवहेलना कर रहे हैं। अगर ग्रामीण संयम नहीं बरतते, तो जान-माल का नुकसान हो सकता है।

हाथियों के सामने जान जोखिम में डाल रहे ग्रामीण

भरनो प्रतिनिधि। प्रखंड के दुम्बो पंचायत क्षेत्र अंतर्गत दुम्बो पीपरटोली,खक्सीटोली व चम्पाटोली के आस-पास 16 जंगली हाथियों के झुंड के प्रवेश से ग्रामीणों में भय का माहौल व्याप्त है। हाथियों के झुंड से खतरे का साया तो मंडरा ही रहा है,लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस खतरे को टालने के बजाय ग्रामीण खुद उसे न्योता दे रहे हैं। जंगली हाथियों की मौजूदगी से ज्यादा भयावह स्थिति ग्रामीणों की वही बेकाबू भीड़ है,जो कानून, प्रशासनिक आदेश और अपनी जान की परवाह किए बिना गजराज को उकसाने में जुटी है। हाथियों के खतरे को देखते हुए प्रशासन द्वारा क्षेत्र में धारा163 निषेधाज्ञा लागू की गई है,जिसके तहत भीड़ एकत्रित करने पर रोक है।

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इसके बावजूद भरनो के इन इलाकों,सड़कों और खेतों में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण हाथियों को देखने तमाशबीन बने हुए हैं।लोग न केवल निषेधाज्ञा की धज्जियां उड़ा रहे हैं,बल्कि हाथियों के बेहद करीब जाकर पत्थरबाजी, शोर-शराबा और हुटिंग कर उन्हें जानबूझकर उकसा रहे हैं।स्थिति तब और गंभीर हो गई जब चंपाटोली के पतरा क्षेत्र,जहां हाथियों का झुंड अपना डेरा जमाए हुए है, वहां कुछ उदंड युवकों द्वारा अंदर घुसकर आग लगाए जाने की बात सामने आई। यह न केवल वन्यजीव संरक्षण कानून,बल्कि प्रशासनिक आदेशों का खुला उल्लंघन है।ग्रामीणों के इस बेतुके और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार ने शांत स्वभाव वाले गजराज को आक्रामक बना दिया है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार हाथी सामान्यतः शांत जीव होते हैं,लेकिन जब उन्हें चारों ओर से घेरकर पत्थर मारे जाएं, हुटिंग की जाए और उनकी निजता में दखल दिया जाए, तो उनका धैर्य टूटना स्वाभाविक है।यही कारण है कि हाथियों के व्यवहार में अब हिंसक बदलाव देखा जा रहा है। ..... सेल्फी का जुनून या खुदकुशी की तैयारी? भीड़ में शामिल कई युवक हाथियों के बेहद करीब जाकर सेल्फी और वीडियो बनाने में लगे हुए हैं।यह साहस नहीं,बल्कि घोर लापरवाही और मूर्खता है। एक छोटी सी गलती न केवल वीडियो बनाने वाले की जान ले सकती है,बल्कि पूरे गांव को हाथियों के गुस्से का शिकार बना सकती है।यह साफ है कि हाथी हमला शिकार के लिए नहीं,बल्कि आत्मरक्षा में करता है। लगातार छेड़छाड़, पत्थरबाजी और उकसावे की कार्रवाई ग्रामीणों को भारी नुकसान की ओर धकेल रही है।जरूरत है कि ग्रामीण संयम बरतें और प्रशासन थोड़ा सख्ती दिखाए,भीड़ को खदेड़े और दोषियों पर कार्रवाई करे।अन्यथा,यदि गजराज का धैर्य टूट गया,तो जान-माल की भारी क्षति से इनकार नहीं किया जा सकता। पूर्व में भी इस क्षेत्र में दो लोगों की जान हाथियों ने ले चुकी है। हाथियों के झुंड ने पिछले दो बार इस क्षेत्र में प्रवेश के दौरान सुपा महुवाटोली एवं मोरगांव पतरा में दो अलग अलग लोगों की जान ले चुकी है,फिर में लोगो की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। क्यूआरटी टीम लगातार हाथियों पर बनाए रखी है नजर वन विभाग गुमला की टीम एवं क्यूआरटी टीम प्रभारी वनपाल राकेश मिश्रा के नेतृत्व में लगातार हाथियों की गतिविधियों पर अपनी नजर बनाए हुए हैं,और लोगो की भीड़ को बार बार चोगा के माध्यम से एलाउंस करके समझाने का काम कर रही है,पर विभाग के कर्मियों का अपील कोई नहीं सुन रहा है।शनिवार की देर शाम को क्यूआरटी टीम पूरी तैयारी के साथ मशाल जलाकर हाथियों को क्षेत्र से बाहर निकालने में जुट गई है।वन विभाग की टीम में प्रभारी वनपाल राकेश मिश्रा,वनरक्षी रजत किरण डुंगडुंग,प्रवीण तिर्की,योगिता कुमारी,सतीश भगत,जगजीवन सिंह सहित भरनो थाना की पुलिस मौजूद रही।

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