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आठ महीने बाद बाघलता पाठ में फिर जली बिजली, हर्ष

आठ महीने बाद बाघलता पाठ में फिर जली बिजली, हर्ष

संक्षेप:

चैनपुर के छिछवानी पंचायत के आदिवासी गांव बाघलता पाठ में आठ महीने बाद बिजली बहाल हो गई। मार्च में ट्रांसफार्मर जलने के बाद ग्रामीण अंधेरे में थे। जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा की पहल से नया ट्रांसफार्मर लगाया गया, जिससे गांव में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने उनके प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया।

Nov 17, 2025 11:27 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गुमला
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चैनपुर, प्रतिनिधि। प्रखंड की छिछवानी पंचायत के सुदूरवर्ती आदिवासी बहुल गांव बाघलता पाठ में आठ महीने बाद आखिरकार बिजली बहाल हो गई। घने जंगल और पहाड़ी इलाके में बसे इस गांव में सोमवार की सुबह बिजली जलते ही ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे और लोगों ने राहत की लंबी सांस ली। मार्च माह में ट्रांसफार्मर जल जाने के बाद से पूरा गांव अंधेरे में डूबा हुआ था। जिससे ग्रामीण लगातार गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे थे। गांव की आदिम जनजातीय आबादी के लिए बिजली न होना किसी बड़े संकट से कम नहीं था। मोबाइल चार्ज न होने के कारण ग्रामीणों का बाहर काम करने गए अपने परिवारजनों से संपर्क लगभग टूट गया था।

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लोग फोन चार्ज कराने के लिए कई किमी पैदल चलकर दूर-दराज ठिकानों पर जाने को मजबूर थे। ग्रामीण रामेश्वर मुंडा ने बताया कि गांव में अंधेरे के कारण रात में किसी भी प्रकार की गतिविधि करना मुश्किल हो जाता था। कई बार विभाग से शिकायत की गई, लेकिन ट्रांसफार्मर बदलने का काम नहीं हो पाया। समस्या बढ़ती देख ग्रामीणों ने जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा से मदद की अपील की। मामले की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने तुरंत विद्युत विभाग से संपर्क साधा और गांव की दुर्दशा से विभाग को अवगत कराया। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर नया ट्रांसफार्मर लगाने की मांग की। उनकी सक्रिय पहल के बाद विभाग हरकत में आया और रविवार को गांव में नया ट्रांसफार्मर लगा दिया गया। सोमवार सुबह बिजली आने के बाद गांव में खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीण गंदूर मुंडा, सुगलु असुर, राजेंद्र मुंडा, प्रकाश मुंडा, कमल भगत, रामेश्वर मुंडा, बंधु मुंडा, जागेश्वर मुंडा सहित कई लोगों ने मेरी लकड़ा के प्रति आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय से ट्रांसफार्मर बदलने का काम लंबित था, लेकिन जिला परिषद सदस्य के प्रयासों से गांव को अंधेरे से मुक्ति मिली है।