आदिम जनजातियों को 527 हेक्टेयर वन भूमि पर मिला सामुदायिक अधिकार
गुमला जिले के डोकापाठ में वन महोत्सव के दौरान स्थानीय आदिम जनजातीय समुदायों को वनाधिकार अधिनियम-2006 के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार का पट्टा प्रदान किया गया। 527 हेक्टेयर वन भूमि पर अब ग्रामीणों के पूर्ण अधिकार होंगे। कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने जंगल की सुरक्षा के लिए सक्रिय भागीदारी की अपील की।
चैनपुर संवाददाता। गुमला जिले के सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्र स्थित डोकापाठ में शुक्रवार को आयोजित वन महोत्सव के दौरान स्थानीय आदिम जनजातीय समुदायों को वनाधिकार अधिनियम -2006 के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकार का पट्टा प्रदान किया गया। फिया फाउंडेशन के सहयोग से प्रशासन ने डोकापाठ और लीगिरपाठ समेत चार गांवों के पारंपरिक वन क्षेत्र पर ग्रामीणों के कानूनी दावे को मान्यता दी। कुल 527 हेक्टेयर (लगभग 1300 एकड़) वन भूमि अब इन गांवों के फल,फूल और अन्य वनोपज पर ग्रामीणों के पूर्ण अधिकार का प्रमाण बनेगा। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा, रेंजर जगदीश राम और फिया फाउंडेशन के ललित उरांव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मौके पर जिला परिषद सदस्य और जिला वनाधिकार समिति की सदस्य मेरी लकड़ा ने कहा कि यह पट्टा सिर्फ एक कागज नहीं बल्कि जल-जंगल-जमीन की अस्मिता का प्रमाण है। उन्होंने ग्रामीणों से आग लगाकर वन संपदा को नुकसान पहुंचाने से बचने और जंगल की सुरक्षा में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकार के साथ जिम्मेदारी भी आती है और जंगल की रक्षा करना अब सभी ग्रामीणों का कर्तव्य है। रेंजर जगदीश राम ने प्रशासनिक और कानूनी निर्देशों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस 527 हेक्टेयर क्षेत्र में अवैध कटाई,अतिक्रमण,पत्थर उत्खनन या वन्यजीवों का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित है। ग्राम सभा की निगरानी के बावजूद किसी गैरकानूनी गतिविधि पर विभाग सख्त कार्रवाई करेगा।जंगल की देखरेख के लिए एक विशेष वन संसाधन प्रबंधन समिति का गठन किया गया है। इसमें डोकापाठ गांव के इतवारी असुर हिन्दू असुर, फिल्मोंन असुर और प्रदीप असुर को मुख्य प्रहरी नियुक्त किया गया है। यह समिति प्रतिदिन जंगल की निगरानी करेगी और सीमांकन क्षेत्र को सुरक्षित बनाए रखेगी। कार्यक्रम में चैनपुर मुखिया शोभा देवी, वनपाल बुद्धदेव बड़ाईक,चंद्रेश उरांव और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

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