कई सुविधाओ से महरुम है कालचित्ति पंचायत के पहाड़ो पर बसा टिकरी गांव
घाटशिला के टिकरी गांव में बुरुडीह डैम के निर्माण के बाद से लोग कई सुविधाओं से वंचित हैं। यहां लगभग 200 परिवार रहते हैं, लेकिन खराब सड़कें, संचार की कमी और पेयजल संकट जैसी समस्याएं उन्हें परेशान कर रही हैं। ग्रामीणों ने कई बार अपनी समस्याओं को उठाया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिला।
घाटशिला। 1983 में बुरुडीह डैम बनने के बाद विस्थापित हुए टिकरी गांव के लोग आज भी कई सुविधाओ से मरहुम है। टिकरी गांव में लगभग 200 परिवार रहते है, जिनका आजिविका का साधन लकड़ी काटकर बेचना है या फिर थोड़ी बहुत खेती बाड़ी है। इस गांव की सबसे बड़ी समस्या सड़क की है। बुरुडीह डैम के पहाड़ो के उपर बसा इस गांव में जाने के लिए दो किलोमीटर तक सड़क इतनी खराब है कि इस पर चलना ही मुश्किल है। इस गांव तक जाने के लिए सड़क कम गड्डे ज्यादा है। जंगल के बिच बसा इस गांव में रात के समय कोई बिमार हो जाता है तो लोगों को सड़क के कारण सुबह का इंतजार करना पड़ता है।
गांव में सड़क के निमार्ण को लेकर ग्रामीणों ने कई बार प्रयास किया, लेकिन नतीजा शिफर ही रहा। इस गांव में दुसरी सबसे बड़ी समस्या टॉवर को लेकर है। बुरुडीह डैम से उपर जब गांव के मुख्य रास्ते में प्रवेश करते है तो टावर चला जाता है। गांव के ग्रामीणों को मोबाईल से बात करना होता है तो उन्हे गांव से दो किलोमीटर दुर बुरुडीह मुख्य सड़क पर आनी होती है, तभी बात हो जाता है। अगर रात में किसी प्रकार की कोई समस्या उत्पन हो जाये तो आप चाहकर भी किसी रिस्तेदार या अन्य लोगों को जानकारी नही दे सकते। इस गांव में पेयजल को लेकर भी काफी दिकक्ते है। गांव डैम के किनारे बसा होने के बाद भी गांव के अधिकतर चापाकल खराब पड़े हुए है, एक दो सोलर जलमिनार जरुर लगा है, लेकिन सोलर जलमिनार अधिकतर खराब पड़े है, एक दो जलमिनार या चापाकल जो ठीक है, ग्रामीण उसी से काम चलाते है। इस संबंध में ग्रामीणों ने कहा कि हमारे गांव में कभी सांसद और विधायक भी नही आते जिन्हे हमलोग अपनी समस्या सुना पाते, हमलोग भगवान भरोसे जी रहे है, सड़क को लेकर कई बार आंदोलन किया, लेकिन कुछ नही हुआ, अब थक हारकर वो भी करना छोड़ दिया हुं।

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