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खानपान में ग्रामीण कर रहे कोचरा तेल का उपयोग

हिन्दुस्तान टीम,घाटशिलाNewswrap
Sat, 26 Jun 2021 05:31 PM
खानपान में ग्रामीण कर रहे कोचरा तेल का उपयोग

सरसों तेल के दाम बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्र के लोग सरसों तेल खाना छोड़कर कोचरा तेल का इस्तेमाल करने लगे हैं। हालांकि, कोचरा तेल शरीर में लगाने और दीप जलाने के लिए ठीक है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए चिकित्सक इसे हानिकारक मानते हैं।

जोड़सा पंचायत के कमारीगोडा गांव के ग्रामीणों की मानें तो महुआ के पेड़ से निकलने वाले बीज को कोचरा कहते हैं। पेड़ पर लगा महुआ जब सूखकर गिर जाता है तो उस पेड़ के फल (बीज) को पेड़ से तोड़कर या फिर गिरे को चुनकर ग्रामीण लाते हैं और सड़क पर उसे सुखाते हैं। जब बीज सूख जाता है तो उसे मशीन में पीसकर कोचरा तेल निकालते हैं। क्षेत्र के कमारीगोड़ा गांव के गोड़ाडीह में सड़क पर कोचरा को सुखाने की होड़ साफ देखने को मिली।

ज्यादा निकलता है कोचरा

कमारोगड़ा गांव के गोपाल चन्द महतो ने कहा कि झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ के पेड़ अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इस पेड़ की खासियत यह है कि इसके फूल और फल दोनों का ही उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि महुआ पेड़ से जब महुआ समाप्त हो जाता है, तब उसके एक महीने बाद महुआ के फल, जिसे कोचरा कहते हैं, उसका रोजमर्रा के जीवन में उपयोग किया जाता है।

इसमें हो रहा कोचरा तेल का उपयोग

ग्रामीण की मानें तो कोचरा तेल का उपयोग रोजमर्रा के जीवन में भोजन में प्रयोग तो हो ही रहा है, इसके अलावा शरीर में लगाने और आयुर्वेदिक दवा में भी उपयोग किया जाता है। इससे निकलने वाले खल्ली का उपयोग खेतों में किया जा है, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और पैदावार अच्छी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि वैसे तो इसे खाने का शौक नहीं है, लेकिन सरसों तेल के अधिक मंहगा होने के कारण इसे मजबूरी में खाना पड़ रहा है।

हो सकती हैं बीमारियां

कोचरा तेल के प्रयोग के संबंध में चिकित्सक भोगान हेम्ब्रम का कहना है कि इस तेल को तैयार करने के बाद शरीर में लगाने दीप जलाने तक ठीक है। इसे खेत में डालकर भी ज्यादा पैदावार कर सकते है, लेकिन खाने में प्रयोग हानिकारण है, क्योंकि इस तेल के प्रयोग से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं।

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