घाटशिला के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुविधाओं का अभाव, दूर हो रहे पर्यटक
घाटशिला में पर्यटन विकास के लिए घोषणाओं के बावजूद, सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। पिछले पांच वर्षों में पर्यटकों की संख्या में गिरावट आई है। बुरुडीह डैम, धारागिरी और अन्य पर्यटन स्थलों पर मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। होटल संचालकों का कहना है कि पहले की तुलना में पर्यटकों की संख्या कम हो गई है।

घाटशिला। सरकार द्वारा पर्यटन विकास के लिए लगातार घोषणाएं किए जाने के बावजूद घाटशिला के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। इसके कारण यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में साल दर साल गिरावट दर्ज की जा रही है। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि हर साल दो से तीन हजार पर्यटक कम पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि जो पर्यटक एक बार घाटशिला के पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर लेते हैं, वे सुविधाओं की कमी के कारण दोबारा आने से कतराते हैं। गौरतलब है कि घाटशिला की लगभग 60 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से पर्यटन से होने वाली आय पर निर्भर है और इसी से अपने परिवार का भरण-पोषण करती है。
बुरुडीह डैम में सुविधाओं का घोर अभाव
घाटशिला का प्रमुख पर्यटन स्थल बुरुडीह डैम प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। चारों ओर पहाड़ियों से घिरा और पानी से लबालब भरा यह डैम किसी पहाड़ी पर्यटन स्थल से कम नहीं दिखता। इसके बावजूद यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क नहीं है। डैम परिसर में स्वच्छ पेयजल, बैठने की समुचित व्यवस्था और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। विशेषकर महिला पर्यटकों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। प्रशासनिक उदासीनता के कारण पिछले तीन वर्षों से यहां सरकारी स्तर पर नौका परिचालन भी बंद पड़ा है।
धारागिरी तक पहुंचना भी चुनौती
धारागिरी पर्यटन स्थल तक पहुंचने के लिए बासाडेरा गांव से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। हालांकि इस मार्ग की स्थिति अत्यंत जर्जर है। पर्यटन स्थल पर न तो पेयजल की व्यवस्था है और न ही शौचालय की। इसके अलावा पर्यटकों के लिए दुकान अथवा अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
सुवर्णरेखा तट और पांच पांडव स्थल की भी यही स्थिति
सुवर्णरेखा नदी के विभिन्न घाटों और पर्यटन स्थलों पर भी साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नदी की प्राकृतिक सुंदरता देखने आने वाले पर्यटक दूर से ही नजारा देखकर लौट जाते हैं। इसी प्रकार पांच पांडव पर्यटन स्थल पर भी सुविधाओं का घोर अभाव है। यहां आने वाले अधिकांश पर्यटक केवल छोटे से काली मंदिर का दर्शन कर वापस लौट जाते हैं। कुल मिलाकर कहा जाए तो सुविधाओं की कमी के कारण घाटशिला के प्रमुख पर्यटन स्थल अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
क्या कहते हैं होटल और लॉज संचालक
होटल एवं लॉज संचालकों के अनुसार पहले सितंबर से मार्च के बीच हर वर्ष लगभग 25 से 27 हजार पर्यटक घाटशिला आते थे। इसके कारण नवंबर से फरवरी तक अधिकांश होटल और लॉज पूरी तरह भरे रहते थे। लेकिन अब पर्यटकों की संख्या घटकर 20 से 22 हजार के बीच रह गई है। वर्तमान में केवल 15 दिसंबर से 15 जनवरी तक ही पर्यटकों की अच्छी भीड़ रहती है, जबकि इसके बाद इक्का-दुक्का पर्यटक ही घाटशिला का रुख करते हैं।
आने वाले वर्षों में बदलेगी पर्यटन स्थलों की तस्वीर : विधायक
इस संबंध में विधायक सोमेश सोरेन ने कहा कि घाटशिला के पर्यटन स्थलों के विकास को लेकर सरकार गंभीर है। आने वाले दिनों में बुरुडीह डैम, धारागिरी समेत अन्य पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए कई योजनाओं पर कार्य किया जाएगा।
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