वित्त रहित शिक्षण संस्थानों ने किया प्रदर्शन, नियमावली-2026 को बताया काला कानून
घाटशिला में वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर शिक्षकों और कर्मचारियों ने नियमावली-2026 के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने नियमावली की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया, इसे काला कानून बताया। मोर्चा के नेताओं ने कहा कि यह नियमावली वित्त रहित संस्थानों के अस्तित्व को खतरे में डाल रही है।

घाटशिला, संवाददाता। वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार को घाटशिला अनुमंडल के विभिन्न वित्त रहित शिक्षण संस्थानों में नियमावली-2026 के प्रारूप के विरोध में प्रदर्शन किया गया। इस दौरान शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने नियमावली की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने नियमावली-2026 को वित्त रहित शिक्षण संस्थानों के लिए काला कानून बताते हुए कहा कि इसके लागू होने से वर्षों से संचालित अधिकांश शिक्षण संस्थानों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो जाएगा। मुसाबनी के जीसीजेडी हाई स्कूल, मुसाबनी माइंस इंटर कॉलेज सहित घाटशिला, चाकुलिया, बहरागोड़ा तथा अनुमंडल क्षेत्र के अन्य वित्त रहित शिक्षण संस्थानों में शिक्षक एवं कर्मचारी मुख्य द्वार पर एकत्र हुए और नियमावली के प्रारूप की प्रतियां जलाकर विरोध जताया。
नियमावली का विरोध
शिक्षकों ने कहा कि नई नियमावली में भूमि, सुरक्षा कोष, पुस्तकालय और प्रयोगशाला से संबंधित ऐसी शर्तें जोड़ी गई हैं, जिन्हें अधिकांश वित्त रहित संस्थान पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जहां सरकारी विद्यालयों के लिए एक एकड़ भूमि का प्रावधान है, वहीं वित्त रहित संस्थानों के लिए दो एकड़ भूमि अनिवार्य की गई है। इसके अलावा सुरक्षा कोष की राशि में भी कई गुना वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है।
संस्थानों का योगदान
मोर्चा के नेताओं ने कहा कि राज्य के वित्त रहित शिक्षण संस्थान पिछले 25 से 30 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। नई नियमावली में 1000 वर्ग फीट के चार प्रयोगशाला कक्ष तथा 1000 वर्ग फीट के पुस्तकालय की अनिवार्यता जैसी शर्तें व्यवहारिक नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह नियमावली वित्त रहित शिक्षण संस्थानों को बंद करने की साजिश है।
नेताओं की चेतावनी
मोर्चा के नेताओं कुंदन कुमार सिंह, रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, चंदेश्वर पाठक, देवनाथ सिंह, अरविंद सिंह, गणेश महतो, फजलुल कादरी अहमद, मनीष कुमार, नरोत्तम सिंह, संजय कुमार, मनोज तिर्की, विनय उरांव, मुरारी प्रसाद सिंह एवं रेशमा बेक ने कहा कि राज्य के 1250 से अधिक संस्थानों में नियमावली के प्रारूप का विरोध किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमावली में आवश्यक संशोधन होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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