
पांच दिन कार्य दिवस करने को लेकर हड़ताल पर रहे अनुमंडल के सभी बैंककर्मी
रने को लेकर हड़ताल पर रहे अनुमंडल के सभी बैंक कर्मी 0 बैंक के हड़ताल से घाटशिला अनुमंडल में 100 करोड़ का लेनदेन हुआ प्रभावित 0 दर्जनो ग्राहक बैंक आकर
घाटशिला। संवाददाता घाटशिला अनुमंडल के सभी बैंक कम कर्मचारियों द्वारा यूएफबीयू के निर्देशनुसर राष्ट्रव्यापी हरताल मंगलवार को किया गया। हड़ताल के दौरान बैंक के कर्मचारियों नें बैंक के समक्ष जमकर प्रर्दशन किया और अपनी मांगो के समर्थन में नारे लगाये। बैंक के हड़ताल के कारण घाटशिला अनुमंडल में लगभग सभी 66 बैंक में ताले लटके रहे और एक अनुमान के अनुसार लगभग 100 करोड़ का लेनदेन इसके कारण प्रभावित रहा। बैंक के हड़ताल के कारण सबसे बड़ी परेशानी बैंक पहुंचने वाले ग्राहको को रहा, क्योंकि उन्हे मालुम ही नही था कि बैंक में आज हड़ताल है। इस क्रम में मंगलवार को ढ़ाकपाथर गांव से आये सावना सोरेन ने बुर्जूम ने बताया कि वह 100 रुपया खर्च कर बैंक पैसा निकालने आये थे, पहले ही तीन दिन बैंक बंद था।
पैसे के शक्त जरुरत थी। लेकिन30 किलोमीटर दूर से आकर भी हमे निराश होकर लौटना पर रहा है. ऐसे कई बुर्जूग थे, जो बैंक किसी प्रकार पहुंचे थे, लेकिन उन्हे खाली हाथ निराश होकर लौटना पड़ा। पहले तिन दिन से बैंक बंद होने के कारण कई एटीएम में पैसे नही होने के कारण लोगों को पैसे निकालने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। घाटशिला में ही कई एटीएम पैसे के आभाव में बंद पड़े थे। दूसरी ओर बैंक के हड़ताल पर गये कर्मचारी में बैंक ऑफ इंडिया घाटशिला शाखा कल्सटर सदस्य निरज अग्रवाल ने बताया कि सभी बैंक कर्मी पिछले 15 सालों से बैंक का कार्य दिवस सप्ताह में 5 दिन करने की मांग करते आ रहे है। उन्होने बताया कि केन्द्र सरकार के आरबीआई, एलआईसी में सप्ताह में दो दिन छुट्टी रहता है, तो फिर बैंक में दो दिन छुट्टी क्यों नही दी जा सकती है। उन्होने कहा कि 90 प्रतिशत काम आजकल डीजीटल के माध्यम से होता है, इसलिए दो दिन छुट्टी देने के बाद भी कर्मचारी को किसी प्रकार की कोई परेशानी नही होगी। उन्होने कहा कि आईबीए और सीएलसी के सदस्य भी इस मुद्दे पर साकारात्मक रुख है। वावजूद इसके सरकार हमारी मांगो को मानने के लिए तैयार नही है। इसलिए युनियन को मजबुरी में हड़ताल करने को विवश होना पड़ा है। बैंक और इंडिया के घाटशिला शाखा में हड़ताल को सफल बनाने में सुनीता एक्का, पार्थो राय, अशोक बाल्मिकी, धुरखुली रजक, मोती नायक, गौरी बाला सोरेन, राजेश हांसदा, शुशील रजक, समीर दास समेत अन्य लोगों का सराहनीय योगदान रहा।

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