तरबूज उत्पादन का हब बना कालियाम पंचायत का खांड़देवली
चाकुलिया। चाकुलिया प्रखंड अंतर्गत कालियाम पंचायत का खांड़देवली गांव तरबूज की खेती का हब बना है। इस गांव में किसानों ने इस वर्ष लगभग 200 बीघा खेत में

चाकुलिया,संवाददाता। चाकुलिया प्रखंड अंतर्गत कालियाम पंचायत का खांड़देवली गांव तरबूज की खेती का हब बना है। इस गांव में किसानों ने इस वर्ष लगभग 200 बीघा खेत में तरबूज की खेती की है। इस वर्ष पहले की तुलना में तरबूज की खेती अधिक हुई है। किसान निजी स्तर से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कर खेत की सिंचाई करते हैं। सिंचाई के लिए सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इन दिनों खेतों में तरबूज की लतें लहलहाने लगी है। फूल और फल लगने शुरू हो गए हैं। अप्रैल माह से फसल तैयार होने लगेगी। तरबूज खरीदने के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के बड़े शहरों के व्यापारी गांव आने लगेंगे।
खांड़देवली गांव के अलावा पंचायत के लताघर समेत अन्य गांवों में भी किसानों ने तरबूज की खेती की है। खांड़देवली गांव के किसान दीपक मोंगराज ने बताया कि उन्होंने इस बार छह बीघा जमीन पर तरबूज की खेती की है। सुभाष पात्र नामक किसान ने बताया कि उन्होंने सात बीघा खेत में तरबूज की खेती की है। एक बीघा खेती करने में करीब 25000 रुपए खर्च होते हैं। एक बीघा खेत में करीब 100 क्विंटल तरबूज का उत्पादन होता है। पांच रूपये से लेकर 10 रुपए प्रति किलो की दर से तरबूज की बिक्री होती है। उन्होंने बताया कि अप्रैल तक तरबूज की फसल तैयार होकर बाजार में आने लगेगी। किसानों के अनुसार यहां उत्पादित तरबूज की गुणवत्ता इतनी बेहतर होती है कि फसल तैयार होते ही पश्चिम बंगाल के बर्दमान, हुगली, धूलागढ़ और कोलकाता के साथ-साथ रांची जैसे बड़े शहरों से व्यापारी सीधे गांव तक पहुंचते हैं। अन्य राज्यों से आने वाले व्यापारियों के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ता। क्योंकि गर्मियों में तरबूज की मांग खूब होती है।
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