शालदोहा गांव में तीन हाथियों की झुंड ने खेतों में घुसकर किसानों की धान का बिछड़ा को किया बर्बाद
बहरागोड़ा के शालदोहा गांव में हाथियों के झुंड ने किसानों के धान के बिछड़े को बर्बाद कर दिया। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दिनों भी हाथियों ने फसल को नुकसान पहुँचाया था। किसानों ने हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मेहनत पर पानी फिर गया। वन विभाग ने हाथियों पर निगरानी बढ़ा दी है और किसानों को मुआवजे का आश्वासन दिया है।
बहरागोड़ा।बहरागोड़ा प्रखंड क्षेत्र के मानुषमुड़िया पंचायत अंतर्गत शालदोहा गांव में तीन हाथियों की झुंड ने खेतों में घुसकर किसानों की धान का बिछड़ा को बर्बाद कर दिया।ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार यह झुंड जंगल के पास स्थित श्मशान घाट के रास्ते खेतों तक पहुंचा और थोड़ी ही देर में पूरी धान के बिछड़े को रौंद दीया। पिछले दिनों धान पकते ही हाथियों की झुंड ने आकर पके हुए धान खा गए थे जिससे किसानों को आर्थिक समस्या झेलनी पड़ी थी। अब गरमा धान की खेती के लिए किसानों ने धान के बिछड़े तैयार कर चुके थे परंतु हाथियों की झुंड ने इसे भी बर्बाद कर दिया।
किसान बम-पटाखे और मशाल जलाकर हाथियों को भगाने की कोशिश करते रहे, लेकिन तब तक उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर चुका था। ग्रामीणों ने बताया कि यह झुंड पिछले कई दिनों से इलाके में आतंक मचा रहा है। किसानों ने कहा की शालदोहा गांव की जमीन उपजाऊ मानी जाती है। जहां किसान एक दो दिनों के अंदर बिछड़े को खेत लगाने के लिए जुटे थे। लेकिन हाथियों के इस हमले ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बार-बार हो रहे हाथियों के हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है। कई किसान अब रात में अपने खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं।इसकी सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम शालदोहा गांव पहुंची। वन विभाग द्वारा बताया गया कि हाथियों के झुंड पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। फिलहाल उन्हें लोधासूली जंगल के जंगल की ओर खदेड़ दिया गया है। उन्होंने बताया कि ये हाथी भ्रमणशील हैं। संभावना है कि वे दोबारा शालदोहा इलाके में प्रवेश कर सकते हैं। ग्रामीणों से अपील किया है कि किसी भी हाथी या झुंड को देखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें और उनसे दूरी बनाकर रखें।विभाग की ओर से इलाके में गश्ती बढ़ा दी गई है ताकि दोबारा नुकसान से बचा जा सके।इधर रेंजर दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिन किसानों की फसल हाथियों द्वारा नष्ट की गई है, उन्हें नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रभावित किसान वन विभाग को आवेदन दें, जिसके बाद संबंधित अंचल कार्यालय के माध्यम से नुकसान का आकलन किया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद किसानों को मुआवजा देकर उनकी भरपाई की जाएगी।

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