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खरसती नाला के पानी से तैयार होता है भोजन, बुझती है प्यास

घाटशिला प्रखंड की बड़ाजुड़ी पंचायत अर्न्तगत मुराकाटी गांव के लोग पंचायत प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और अधिकारियों की उदासीनता के कारण बूंद-बूंद पानी के...

खरसती नाला के पानी से तैयार होता है भोजन, बुझती है प्यास
हिन्दुस्तान टीम,घाटशिलाWed, 19 Jun 2024 06:00 PM
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घाटशिला प्रखंड की बड़ाजुड़ी पंचायत अर्न्तगत मुराकाटी गांव के लोग पंचायत प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि और अधिकारियों की उदासीनता के कारण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। बावजूद इसके इनकी समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। संथाल बहुल इस गांव में तीन टोला को मिलाकर लगभग 100 परिवार गुजर बसर करते हैं। इस गांव में कहने को तो तीन टोला में मिलाकर आठ चापाकल और दो जलमीनार हैं। लेकिन यह सुनकर आपको आश्चर्य होगा की सभी के सभी पिछले कई माह से खराब पड़े हैं। गांव के लोगों को 2019-20 में मुख्यमंत्री नल जल योजना के जरिये हर घर में नल से पानी की आपूर्ति शुरू की गई थी। लेकिन गर्मी शुरू होते ही मार्च में जलमीनार खराब हो गई। लिहाजा पानी की आपूर्ती बंद हो गई। चापाकल और जलमीनार दोनों खराब हो गई। इस कारण ग्रामीणों को पानी के लिए जब कोई उपाय नहीं सुझा तो वह पास के खरसती नदी के नाले से बहने वाला पानी का प्रयोग खाना बनाने से लेकर नहाने धोने तक करने लगे। लेकिन प्रचंड गर्मी के कारण पानी का श्रोत भी कम हो गया है, और वह गंदा और मटमैला है। जिससे ग्रामीणों में बीमारी फैलने का खतरा मंडराने लगा है। इस संबंध में गांव के राजू मुर्मू, गाजू मुर्मू, रमेश सोरेन समेत अन्य लोगों का कहना है कि चापाकल और जलमीनार ठीक करने को लेकर कई बार पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर विभागीय अधिकारियों को आवेदन दिया, लेकिन किसी ने उनके इस गंभीर समस्या पर अमल नही किया। जिसके कारण आज भी यह समस्या गंभीर बनी हुई है। गांव में पेयजल की गंभीर समस्या और सभी नल और जलमिनार खराब होने के लेकर मुखिया रायश्री समाद से जानकारी ली गई तो उन्होनें कहा कि मुराकाटी गांव में पेयजल समस्या को लेकर जानकारी है, लेकिन पहले फंड नहीं था। अब फंड आने वाला है, गांव वाले से खराब पड़े चापाकल और जलमीनार की सूची मांगी गई है। प्राथमिकता के आधार पर फंड के अनुसार, जलमीनार की मरम्मत कराई जाएगी। इस संबंध में विधायक रामदास सोरेन ने कहा कि पेयजल समस्या के निदान को लेकर वह खुद गंभीर है। इसको लेकर विभागीय अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि क्षेत्र में जितने भी चापाकल और जलमीनार खराब पड़े हैं, सभी को प्राथमिकता के आधार पर ठीक करायें, कही फंड की कमी है तो भी जानकारी हमें दें। उन्हें फंड भी उपलब्ध कराया जायेगा। जहां तक मुराकाटी गांव की बात है तो वहां पहले अधिकारी और कर्मचारी को भेजकर समस्या दूर की जायेगी।

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