Ghatsila News: मिट्टी से देवी-देवताओं का स्वरूप गढ़ रहे रामचंद्र भगत, दशकों से जीवित रखे हैं पारंपरिक शिल्प की विरासत
Ghatsila News: जादूगोड़ा में रामचंद्र भगत देवी-देवताओं की मूर्तियों का निर्माण करते हैं। उन्होंने बिना औपचारिक प्रशिक्षण के स्थानीय कलाकारों के साथ अनुभव प्राप्त किया। उनके पुत्र भी इस कला में उनके साथ शामिल हो रहे हैं। इस वर्ष दुर्गापूजा और अन्य त्योहारों के लिए कई समितियों से मूर्तियों के ऑर्डर मिले हैं।

Ghatsila News: जादूगोड़ा। जादूगोड़ा मोड़ चौक के समीप राजकीय उच्च विद्यालय के बगल में स्थित एक टेंट इन दिनों देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के निर्माण का केंद्र बना हुआ है। यहां मिट्टी को केवल आकार नहीं दिया जाता, बल्कि करीब 60 वर्षीय शिल्पकार रामचंद्र भगत अपने हुनर, मेहनत और श्रद्धा से उसमें देवी-देवताओं का स्वरूप गढ़ते हैं। राचंद्र दो पीढ़ियों से जादूगोड़ा और आसपास के क्षेत्रों के पूजा पंडालों के लिए प्रतिमाओं का निर्माण करते आ रहे हैं। इनके पास पांच हजार से 25 हजार तक की मूर्तियां हैं। जानकारी के अनुसार, आसनबनी क्षेत्र के कोगदा गांव में जन्मे रामचंद्र ने मूर्तिकला का प्रशिक्षण किसी संस्थान से नहीं लिया। बचपन में पड़ोस के एक परिवार को प्रतिमा बनाते देखकर उनके मन में इस कला के प्रति रुचि पैदा हुई। इसके बाद उन्होंने स्थानीय कलाकारों के साथ काम करते हुए धीरे-धीरे मिट्टी तैयार करने, ढांचा बनाने, चेहरे की भाव-भंगिमा उकेरने और प्रतिमा को अंतिम रूप देने की बारीकियां सीखीं। वर्षों के अभ्यास और मेहनत ने इस कला को उनकी पहचान बना दिया。
मिट्टी के ढेले से शुरू होती है प्रतिमा की कहानी
रामचंद्र भगत की कार्यशाला में प्रतिमा निर्माण की प्रक्रिया काफी मेहनत भरी होती है। सबसे पहले मिट्टी को तैयार किया जाता है। इसके बाद पुआल और ढांचे की मदद से प्रतिमा का आकार तैयार किया जाता है। फिर चेहरे की बनावट, आंखों की भाव-भंगिमा, बाल, आभूषण और वस्त्रों की बारीकियों को हाथों और औजारों की मदद से उकेरा जाता है। प्रतिमा के सूखने के बाद रंग और सजावट के जरिए उसे आकर्षक और जीवंत स्वरूप दिया जाता है।
पिता से पुत्र तक पहुंच रही कला
इस पारंपरिक कला की खास बात यह है कि अब यह अगली पीढ़ी तक भी पहुंच रही है। रामचंद्र भगत अपने पुत्र के साथ मिलकर प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे हैं। पुत्र भी पिता के साथ काम करते हुए मूर्ति निर्माण की बारीकियां सीख रहे हैं। उनका कहना है कि पिता के सरल, मिलनसार और हंसमुख स्वभाव के साथ-साथ उनकी कला ने उन्हें काफी प्रभावित किया है।
दुर्गापूजा समेत कई प्रतिमाओं के मिले हैं ऑर्डर
इस वर्ष दुर्गापूजा के लिए रामचंद्र भगत की टीम को चार पूजा समितियों से प्रतिमा निर्माण का ऑर्डर मिला है। इसके अलावा मां मनसा और श्रीगणेश पूजा के लिए भी विभिन्न समितियों ने प्रतिमाएं बनाने का आग्रह किया है। काली पूजा और मां मनसा पूजा के लिए इस बार बड़ी और आकर्षक प्रतिमाओं के ऑर्डर भी मिले हैं। समय पर प्रतिमाओं को तैयार करने के लिए कार्यशाला में कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।


