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अधिकारियों और कर्मियों के कमी का दंश झेल रहा हैं समाज कल्याण विभाग, आंगनबाड़ी केन्द्र का नियमित नही हो रहा है मॉनिटरिंग

समाज कल्याण विभाग अधिकारियों और कर्मियों की कमी का दंश क्षेल रहा है। जिसके कारण विभाग के अतंर्गत संचालित जिले के सभी 1330 आंगनबाड़ी केन्द्र का...

अधिकारियों और कर्मियों के कमी का दंश झेल रहा हैं समाज कल्याण विभाग, आंगनबाड़ी केन्द्र का नियमित नही हो रहा है मॉनिटरिंग
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हिन्दुस्तान टीम,गढ़वाSun, 23 Jun 2024 01:15 AM
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गढ़वा। समाज कल्याण विभाग अधिकारियों और कर्मियों की कमी का दंश क्षेल रहा है। जिसके कारण विभाग के अतंर्गत संचालित जिले के सभी 1330 आंगनबाड़ी केन्द्र का नियमित रूप से मॉनिटरिंग नही हो पा रहा है। वहीं आवंटन के अभाव में पोषाहार योजना का भुगतान फरवरी माह के बाद से सेविका-सहायिकाओं को नही हुआ है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार लाभुकों के बीच प्रत्येक माह पोषाहारका वितरण किया जा रहा है। विभागीय जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ी है। आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष 2023 के अप्रैल माह में जिले में कुल कुपोषित बच्चों की संख्या 27 था। जो इस वर्ष अप्रैल माह में बढ़कर 61 हो गया। हांलाकि कुपोषित बच्चों की संख्या में हर माह बदलाव होते रहता है। विभागीय जानकारी के अनुसार समाज कल्याण विभाग के अतंर्गत जिले में महिला पर्वेक्षिकाओं का कुल स्वीकृत पद 50 है। जबकि वर्तमान में जिले में मात्र 23 ही कार्यरत है। जबकि महिला पर्वेक्षिकाओं का 27 पद रिक्त है। वहीं जिले में कुल नौ परियोजना है। उसके अनुरूप सभी परियोजनाओं में एक-एक प्रखंड परियोजना पदाधिकारी कार्यरत होते है। वर्तमान में गढ़वा जिला के सिर्फ दो परियोजना नगर ऊंटारी और गढ़वा में ही प्रखंड परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) तैनात है। जबकि शेष सात परियोजना का प्रभार संबंधित प्रखंड के बीडीओ-सीओ प्रभार में है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्तमान समय में जिले में गर्भवती महिलाओं की संख्या 7850 है। जबकि कुल धातृ महिलाओं की संख्या 4815 है। गर्भवती और धातृ महिलाओं को विभागीय स्तर से आंगनबाड़ी केन्द्रों को प्राप्त होने वाली खाद्य सामाग्री का पैकेट हर माह वितरण किया जाता है। वहीं आंगनबाड़ी केन्द्र में ती से छह साल के कुल अध्यनरत छात्र-छात्राओं की कुल संख्या 58 हजार 829 है। समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत अधिकारियों और कर्मियों के कमी के कारण विभाग के अंतर्गत होने वाले कन्यादान योजना, सावित्रीबाई फूले योजना, वन स्टेप सेंटर के कार्यो में प्रतिकूल असर पड़ता है। साथ ही आंगनबाड़ी केन्द्रों का नियमित रूप से मॉनिटरिंग नही हो पाता है।

महिला पर्वेक्षिकाओं और सीडीपीओ की कमी के कारण केन्द्रों का निरीक्षण के कार्यो पर असर पड़ता है। हांलाकि विभाग उपलब्ध संसाधन में विभाग के योजनाओं को आम-आवाम तक पहुंचाने की दिशा में बेहतर काम कर रहा है। प्रमेश कुश्वाहा, समाज कल्याण पदाधिकारी

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