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गढ़वा

आदिवासी बहुल चिरकुटही गांव तक नहीं पहुंची विकास की किरण

हिन्दुस्तान टीम,गढ़वाPublished By: Newswrap
Tue, 25 Aug 2020 11:12 PM
आदिवासी बहुल चिरकुटही गांव तक नहीं पहुंची विकास की किरण

जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर आदिवासी बहुल चिरकुटही टोला तक विकास की किरणें नहीं पहुंच सकी। टोले की आबादी करीब 300 है। गांव में जहां बिजली सहित अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं वहीं कई जरूरतमंदों को न तो पेंशन मिल रहा है, न ही अन्य योजनाओं का लाभ। गांव के लोग अपने हाल पर जी रहे हैं। आजादी के 73 साल बाद भी बुनियादी सुविधाएं और योजनाओं का लाभ गांव तक नहीं पहुंचने से ग्रामीणों में आक्रोश भी है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनके गांव को उपेक्षित रखा गया है। भीम आर्मी के प्रदेश महासचिव गिरिजानंदन उरांव आरोप लगाते हैं कि पंचायती राज व्यवस्था में भी गांव तक योजना का लाभ नहीं पहुंचाकर उपेक्षित रखा गया है। अब ग्रामीणों के एकजुट होकर अपने हक और अधिकार को लेकर लड़ाई लड़नी होगी।

गांव में कई ऐसे जरूरतमंद हैं जिन्हें वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। गांव के लोग प्रधानमंत्री आवास, शौचालय, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था, पीने के लिए पानी, बिजली, सड़क नहीं है। गांव के लोगों के पास अबतक मुकम्मल घर नहीं है। पीएम आवास का लाभ भी नहीं मिला। अभी भी कई ऐसे लोग हैं जो प्लास्टिक और घास फूस से बनाए मड़ई में रह रहे हैं। बारिश में उन्हें उसमें भी रहना मुश्किल है। गांव के महेंद्र उरांव, विनोद उरांव, माला देवी, रूनी देवी, नरेश प्रजापति, अवधेश उरांव, रीमा कुंवर, रामसुरत उरांव, विजय उरांव सहित कई अन्य लोग हैं जिनके पास घर नहीं है। किसी तरह प्लास्टिक और घास फूस से घर बनाकर रह रहे हैं। उसी तरह 89 वर्षीय भृगुनाथ उरांव, 64 वर्षीय रामचंद्र उरांव, 63 वर्षीय यशोदा देवी, 70 वर्षीय बासुदेव पाल, 63 वर्षीय रामअवतार पाल, 62 वर्षीय सरोज देवी सहित कई अन्य हैं जिन्हें तत्काल वृद्धापेंशन की जरूरत है। उसके अलावा उसके अलावा कई ऐसी महिलाएं हैं जिन्हें विधवा पेंशन की भी जरूरत है। वहीं 55 वर्षीय नंदु पाल पूरी तरह दृष्टिबाधित हैं। वह बताते हैं कि उन्हें 2004 से 2017 तक पेंशन मिला।

उसके बाद मिलना बंद हो गया। किसी तरह प्रखंड कार्यालय तक गया भी पर किसी ने नहीं सुना। जीविकोपार्जन का कोई साधन भी नहीं है। किसी तरह उनकी जिंदगी कट रही है। लोगों बताया कि पेंशन के लिए उन्होंने कई बार जनता दरबार से लेकर एसडीओ कार्यालय तक आवेदन दिया पर नहीं मिला। अब थक हार कर भगवान भरोसे छोड़ दिए हैं। बिजली नहीं रहने से गांव चार महीने से अंधेरे में है। बिजली ठीक करने के लिए मोटी रकम मांगी गई। उसकी शिकायत विभाग के एसडीओ से भी की गई पर बिजली बहाल नहीं की गई।

गांव में विशेष कैंप लगाया जाएगा। कैंप में ही स्थानीय स्तर पर जिन समस्याओं का समाधान होना होगा उसका ऑन द स्पॉट किया जाएगा। शेष समस्याओं का समाधान जिला स्तर पर कराया जाएगा। अमरेन डांग, बीडीओ।

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