DA Image
5 अगस्त, 2020|11:01|IST

अगली स्टोरी

मुंशी प्रेमचन्द्र की कथा आज भी प्रासंगिक: डॉ नथुनी

default image

पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच की ओर से कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती ऑनलाइन मनायी गई। इस अवसर पर कला एवं साहित्य की अखिल भारतीय संस्था संस्कार भारती के झारखण्ड प्रांत के साहित्य संयोजक डॉक्टर नथुनी पांडेय आजाद ने कहा कि कालजयी कथा-सम्राट मुंशी प्रेमचंद का यह कथन -आशा अपने आप में बड़ी चीज है और फिर बच्चों की आशा उनकी कल्पना कुछ इस तरह की होती है जो राई का पर्वत बना लेती है, आज भी प्रासंगिक है। शंभू कुमार तिवारी ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं में आम आदमी की पीड़ा प्रत्यक्ष नज़र आती है। संस्कार भारती भवनाथपुर इकाई के मंत्री पांडेय सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि संस्कार भारती गढ़वा जिला इकाई के साहित्य संयोजक राजेश कुमार मिश्र ने कहा कि हिंदी साहित्य जगत में मुंशी प्रेमचंद एक ऐसा नाम है जिसे स्मरण किए बिना हिंदी साहित्य जगत अधूरा प्रतीत होता है। फ़िल्म निर्माता प्रेम दीवाना ने कहा कि कालजयी रचनाकार मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य जगत के सूर्य के समान हैं। कवि अद्भुत प्रभात ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं से सभी लोगों को सदैव प्रेरणा मिलती रही है। उनकी रचनाएँ निश्चित रूप से हमें अपने समाज के विषय में सोचने पर विवश करती हैं। श्याम नारायण पांडेय ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ आज भी प्रासंगिक हैं। ब्रजेश तिवारी ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की रचना गोदान भारत के कृषक समाज की आत्मानुभव की अभिव्यक्ति है। नितिन आचार्य ने कहा कि ज़मीन से जुड़े रचनाकार थे मुंशी प्रेमचंद। मंच के निदेशक नीरज श्रीधर स्वर्गीय ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाना अपने आप में एक गर्व की अनुभूति प्रदान करने वाला कृत्य है। हमें उनकी कालजयी रचनाओं को जन-जन तक पहुँचाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। मौके पर अरविंद कुमार तिवारी, कौस्तुभ तिवारी, अनुभव तिवारी, अनल पटेल, अतुल राज, अमन राज ने भी अपने विचार रखे।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Story of Munshi Premchandra still relevant today Dr Nathuni