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भगवन नाम स्मरण में लीन रहना ही जीवन की सच्ची तैयारी: मुक्तिनाथ स्वामी

भगवन नाम स्मरण में लीन रहना ही जीवन की सच्ची तैयारी: मुक्तिनाथ स्वामी

संक्षेप:

प्रयागराज में कथावाचक जगदगुरू रामानुजाचार्य मुक्तिनाथ स्वामीजी ने कथा के तीसरे दिन शुकदेव और राजा परीक्षित के संवाद पर चर्चा की। स्वामीजी ने बताया कि मृत्यु से पहले भगवान का स्मरण और भक्ति करना आवश्यक...

Aug 14, 2025 02:14 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गढ़वा
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श्रीबंशीधर नगर, प्रतिनिधि। प्रयागराज से पधारे कथावाचक जगदगुरू रामानुजाचार्य मुक्तिनाथ स्वामीजी महाराज ने कथा के तीसरे दिन की शुकदेव और परीक्षित संवाद की हृदयस्पर्शी चर्चा करते हुए कहा कि राजा परीक्षित ने शुकदेव जी से पूछा कि मृत्यु के पहले क्या करना चाहिए? उन्होंने कहा कि भगवन नाम स्मरण में लीन रहना ही जीवन की सच्ची तैयारी है। स्वामी जी श्रीराधावंशीधर मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के मौके पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह पर प्रवचन कर रहे थे। स्वामीजी ने शुकदेव परीक्षित संवाद की व्याख्या करते हुए ऋषि शमीक के पुत्र श्रृंगी ऋषि ने राजा परीक्षित द्वारा उनके पिता के गले में मृत सर्प लपेटे जाने की बात सुनकर क्रोध में शाप दिया था कि सातवें दिन तक्षक नाग के दंश से राजा परीक्षित की मृत्यु होगी।

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सातवें दिन मृत्यु निश्चित होने पर राजा परीक्षित ने शुकदेव जी से प्रश्न किया कि जब मृत्यु निश्चित और समय सीमित हो तो मनुष्य को अंतिम समय में क्या करना चाहिए? शुकदेव जी ने उत्तर देते हुए कहा कि मृत्यु से पूर्व मनुष्य को पूर्ण रूप से भगवान की शरणागति कर उनकी कथा का श्रवण करना चाहिए और भगवान का कीर्तन, उनका स्मरण और भजन में ध्यान लगाना चाहिए। सांसारिक मोह, क्रोध और लोभ को त्यागकर भगवन्नाम स्मरण में लीन रहना ही जीवन की सच्ची तैयारी है। उन्होंने बताया कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि आत्मा के परम लक्ष्य की ओर यात्रा है। यह यात्रा तभी सफल होती है, जब मनुष्य अंतिम क्षण तक प्रभु-चिंतन में लीन रहे। स्वामी जी महाराज ने सनातन धर्म की विशिष्टता की व्याख्या की। उन्होंने स्वामी जी महाराज ने कथा में श्री वंशीधर जी की स्थापना और उनकी प्रतिमा की विशिष्टता का विस्तृत वर्णन किया। कथा के दौरान भजन, भगवन्नाम संकीर्तन और श्री राधा वंशीधर जी के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भागवत कथा का रसपान किया।