
कड़ाके की ठंड और शीतलहर से जनजीवन अस्त व्यस्त, जानलेवा बना मौसम प
गढ़वा में पिछले चार दिनों से कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को प्रभावित किया है। न्यूनतम तापमान 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है और ठंड से बचाव के लिए कंबल बांटे जा रहे हैं। डॉक्टरों ने ठंड में स्वास्थ्य जोखिमों की चेतावनी दी है, खासकर बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए।
गढ़वा, प्रतिनिधि। पिछले चार दिनों से कड़ाके की ठंड का प्रकोप जानलेवा साबित हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को न्यूनतम तापमान गिरकर 6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। यह अब तक का सबसे न्यूनतम ताममान रहा। मौसम विभाग ने गढ़वा सहित राज्य के 11 जिलों में शीतलहर का येलो अलर्ट भी जारी किया है। अगले एक सप्ताह तक तापमान 5-6 डिग्री के बीच बने रहने की संभावना जतायी गई है। उधर जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड में है। युद्ध स्तर पर जरूरतमंदों के बीच कंबल का वितरण किया जा रहा है। उधर ठंड और कोहरे के कारण सड़कों पर भी कर्फ्यू जैसे हालात दिखते हैं।
पिछले चार-पांच दिनों से बढ़ती ठंड के कारण नहाने के दौरान शरीर सुन्न होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस तरह के मरीज प्रतिदिन सदर अस्पताल पहुंच रहे हैं। उसके साथ ही सिर में दर्द, शरीर के विभिन्न हड्डियों और जोड़ों में दर्द जैसी समस्या लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। उसके साथ ही सीने और पीठ की दर्द की समस्या भी बढ़ी है। पिछले दो-तीन दिनों में शहर के कई लोग शिकार हुए हैं। वरिष्ठ लोग बताते हैं कि ठंड इतनी अधिक है कि सुबह नहाने के दौरान अचानक शरीर के आधे से अधिक हिस्से से सुन्न हो जाते हैं। उसके बाद घंटेभर शरीर काम करना बंद कर देता है। ::बॉक्स::ठंड में स्ट्रोक, हार्ट अटैक का बढ़ता खतरा आइएमए के अध्यक्ष सह चिकित्सक डॉ अरशद अंसारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि कड़ाके की ठंड में स्ट्रोक और हार्ट अटैक के मामले बढ़ जाते हैं। उन्होंने बुजुर्गों, हृदय रोगियों, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों को अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने, धूप निकलने के बाद ही मॉर्निंग वॉक करने, ऊनी कपड़े, मोजे और टोपी अनिवार्य रूप से पहनने की सलाह दी है। उनके अनुसार अत्यधिक ठंड में नसें सिकुड़ती हैं। उससे रक्त प्रवाह कम होता है और अचानक स्ट्रोक या हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि ठंड के मौसम में रक्तचाप और शुगर के मरीजों के लिए जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इस मौसम में ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज के मामले सबसे अधिक सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि ठंड में थोड़ी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। उसे देखते हुए एहतियातन बीपी और शुगर के मरीजों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया कि ठंड के कारण शरीर की रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं। उससे अचानक रक्तचाप बढ़ जाता है। यही कारण है कि सर्दियों में ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो मरीज पहले से बीपी या शुगर की दवा ले रहे हैं, वे किसी भी स्थिति में दवा बंद न करें और नियमित जांच कराते रहें। डॉ असजद ने सुबह टहलने की आदत रखने वाले बुजुर्गों को सलाह दी कि धूप निकलने के बाद ही घर से बाहर निकलें और सिर, कान व छाती को पूरी तरह ढककर रखें। उन्होंने चेतावनी दी कि ठंड में अचानक ठंडे पानी से स्नान करना खतरनाक हो सकता है। उससे हृदयघात का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मरीजों को तत्काल अस्पताल लाकर चिकित्सक से इलाज कराएं। जितना जल्द मरीजों को अस्पताल लाया जाएगा उनका जीवन उतना ही सुरक्षित रहेगा। बेहतर है कि गुनगुने पानी का इस्तेमाल किया जाए। ::बॉक्स::सुदूरवर्ती इलाकों में भी जनजीवन अस्त व्यस्त:: जिला मुख्यालय के अलावा सुदूरवर्ती इलाकों में भी ठंड और कोहरे के कारण जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। कोयल तटीय मझिआंव नगर पंचायत और गांवों में शीतलहर और कड़ाके की ठंड ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। कनकनी से लोग घरों में दुबके रहे। कई जगहों पर ठंड से निजात पाने के लिए लोग अलाव का सहारा लेते देखे गए। अधिसंख्य घरों में लोग सर्दी- खांसी से परेशान हैं। रेफरल अस्पताल के डॉ विशाल कुमार मिश्रा ने बताया कि अभी ओपीडी में अधिसंख्य मरीज सर्दी, खांसी, वायरल फीवर के मरीज आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ठंड से बचने की जरूरत है। लोग गर्म पानी पीएं। साथ ही गर्म भोजन का सेवन करें।

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