सरस्वती पूजा को लेकर छात्रों में उत्साह, आज होगी मां की पूजा
जिला मुख्यालय से लेकर दूरदराज के इलाकों में मां सरस्वती की पूजा को लेकर उत्साह का माहौल है। मूर्तियों की कीमतें 1000 से 10,000 रुपये तक पहुंच गई हैं। स्थानीय प्रशासन ने पूजा को शांति से मनाने के लिए दिशा-निर्देश दिए हैं। मूर्तिकारों को महंगाई की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

फोटो संख्या एक: जिला मुख्यालय में तैयार की गई मां सरस्वती की प्रतिमाएं गढ़वा, प्रतिनिधि। जिला मुख्यालय से लेकर सुदूरवर्ती इलाकों मे भी सरस्वती पूजा को लेकर उत्साह का माहौल है। शुक्रवार को मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाएगी। विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना को लेकर तैयारी अंतिम चरण में है। पंडालों का निर्माण किया जा रहा है। मां की प्रतिमा बनाने वाले कारीगरों ने बताया कि अबकी साल 1000 रुपये से लेकर 10 हजार तक की मूर्ति बिक रही है। दो दशक पूर्व जहां 50-100 रुपये में मूर्ति मिल जाती थी वह बढ़कर अब 1000 से 10 हजार रुपये में बिका।
उधर स्थानीय प्रशासन की ओर से पूजा शांति और सद्भाव के साथ मने उसे लेकर पंडाल के सदस्यों को हिदायत दी गई है। प्रशासन की ओर से जिला मुख्यालय से लेकर थाना स्तर तक शांति समिति की बैठक कर पूजा समिति और शिक्षण संस्थान के लोगों को सख्त हिदायत दी गई है। डीजे के उपयोग पर पूर्णत: प्रतिबंध लगा दिया गया है। सदर प्रखंड के तेनार गांव निवासी भरत प्रजापति बताते हैं कि पिछले 40 वर्षों से विभिन्न अवसरों पर मूर्ति का निर्माण करते आ रहे हैं। शुरुआत में 50-100 रुपये में प्रतिमा बेचते थे। वर्तमान में 1000 रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक की मूर्ति बिक रही है। महंगाई बढ़ने के साथ मूर्तियों की कीमतों में भी वृद्धि होती रही। उन्होंने कहा कि कच्चा व्यवसाय के कारण कभी-कभी नुकसान भी उठाना पड़ता है। प्रतिमा निर्माण के लिए मोटा मिट्टी तो गांव में ही मिल जाती है लेकिन चिकनी मिट्टी 12 किलोमीटर दूर पलामू जिले के रेहला स्थित कोयल नदी से लाना पड़ रहा है। वहीं लकड़ी भी रेहला टाल से खरीद कर प्रतिमा निर्माण करना पड़ा है। मूर्ति निर्माण के लिए कील, पेंट, रंग, सुतली, पुआल, बांस सहित अन्य सामग्री की कीमत में वृद्धि होने से भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि गणतंत्र दिवस समारोह के कारण मू्र्तियों की बिक्री उत्साहजनक नहीं है। स्कूलों में बच्चे गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी में लगे हैं। इस कारण मूर्तियां कम बिक रही हैं। उनके द्वारा सभी तैयार 72 मूर्तियां बिक जाएंगी यह कहना मुश्किल है। इस कारण अबकी साल घाटा हो सकता है।
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