खतियान बना बाधक, प्रमाण पत्र नहीं बनने से आक्रोश
धुरकी में ग्रामीण क्षेत्रों में जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र बनवाने में परेशानियाँ बढ़ रही हैं। सर्वे के खतियान की शर्त गरीब वर्ग के लिए बाधा बन रही है, जिसके कारण छात्र-छात्राएं सरकारी योजनाओं से वंचित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने सरकार से वैकल्पिक दस्तावेजों को मान्यता देने की मांग की है।

धुरकी, प्रतिनिधि। ग्रामीण क्षेत्रों में जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही परेशानियों को लेकर आम जनता में भारी आक्रोश है। प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए सरकार द्वारा अनिवार्य किए गए सर्वे के खतियान की शर्त गरीब, ग्रामीण व वंचित वर्ग के लिए सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही है। उसके कारण छात्र-छात्राएं सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित हो रहे हैं। ग्रामीण तेतरी देवी, नीतीश यादव, रमेश भुइयां, जितेंद्र परहिया, मुस्ताक अहमद, नवीन कुमार, प्रिया कुमारी, हर्ष कुमार, ज्योति कुमारी, उत्कर्ष राज, सीमा कुमारी, मेघा कुमारी, रूपा कुमारी सहित अन्य लोगों ने बताया कि कई परिवार दशकों से एक ही स्थान पर निवास कर रहे हैं, लेकिन उनके नाम से नया या अद्यतन खतियान उपलब्ध नहीं है।
कई मामलों में खतियान पूर्वजों के नाम पर दर्ज है या पुराने सर्वे के आधार पर है। उसे वर्तमान प्रक्रिया में मान्य नहीं किया जा रहा। परिणामस्वरूप अंचल कार्यालयों और प्रखंड कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं। उक्त समस्या का सबसे अधिक असर छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है। विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं, मैट्रिक-इंटर, स्नातक व प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन, छात्रवृति, सरकारी स्कूलों-कॉलेजों में नामांकन तथा आरक्षण का लाभ लेने के लिए उक्त प्रमाण पत्र अनिवार्य हैं। प्रमाण पत्र नहीं बन पाने के कारण अनेक विद्यार्थी समय पर आवेदन नहीं कर पा रहे। उससे उनका भविष्य खतरे में पड़ता नजर आ रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी योजनाएं भले ही जनहित में बनाई गई हों, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी नियमों और दस्तावेज़ों की जटिलता के कारण वास्तविक लाभार्थी ही बाहर हो रहे हैं। वृद्ध, भूमिहीन, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के लोग इस व्यवस्था से सबसे अधिक प्रभावित हैं। स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि खतियान के अलावा अन्य वैकल्पिक दस्तावेज़ों को भी मान्यता दी जाए। राशन कार्ड, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बिजली बिल, पंचायत स्तर का सत्यापन या ग्राम सभा का प्रमाण या वंशावली के आधार पर भी प्रमाण पत्र निर्गत करने की व्यवस्था की जाए।
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