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आश्रय गृह के सभी बिस्तर के लिए बेडशीट नहीं, साफ-सफाई की भी अनदेखी

फोटो संख्या एक: बाईपास स्थित पुरूष आश्रय गृह की स्थिति जिला मुख्यालय में नगर परिषद की ओर से महिलाओं और पुरूषों के लिए अलग-अलग आश्रय गृह बनाए गए हैं।...

आश्रय गृह के सभी बिस्तर के लिए बेडशीट नहीं,  साफ-सफाई की भी अनदेखी
हिन्दुस्तान टीम,गढ़वाFri, 01 Dec 2023 12:00 AM
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गढ़वा, प्रतिनिधि। जिला मुख्यालय में नगर परिषद की ओर से महिलाओं और पुरूषों के लिए अलग-अलग आश्रय गृह बनाए गए हैं। दोनों ही आश्रय गृहों की क्षमता 50-50 है। उक्त आश्रय गृहों में बमुश्किल क्षमता के अनुरूप कभी कभार ही लोग रहने के लिए पहुंचते हैं। आश्रय गृहों में अव्यवस्था का आलम यह है कि सभी बिस्तर पर बेडशीट नहीं है। वहीं साफ सफाई का भी पूरा ख्याल नहीं रखा जा रहा है।
बाइपास रोड में पुरूषों के लिए आश्रय गृह बनाया गया है। उक्त आश्रय गृह में 50 लोगों के रहने की क्षमता है। फिलहाल आश्रय गृह में औसतन पांच-छह लोग ही रह रहे हैं। आश्रय गृह के सभी बेड पर बेडशीट नहीं है। आश्रय गृह में रहने वाले अमित कुमार बताते हैं कि वह हैदराबाद की खाद-बीज बनाने वाली एक कंपनी के टेरीटरी मैनेजर के पद पर काम करते हैं। वह चार दिनों से आश्रय गृह में हैं। उन्होंने बताया कि आश्रय गृह में रहने में कुछ खास परेशानी नहीं है। साफ सफाई पर भी ध्यान देने की जरूरत है। वहीं पलामू के पांडू का युवक हरिंद्र भी आश्रय गृह में रह रहा है। वह कहीं कहीं काम के साथ पढ़ाई भी करता है। वहीं जामताड़ा के बुटबरिया गांव निवासी जाहिद और सबीर दो तीन दिनों से रह रहे हैं। वह काम धंधा खोजने यहां आए हैं। जाहिद के परिवार में पांच लोग हैं। उनके पिता की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वह ही परिवार का पालन पोषण करता है। उसके साथ सबीर भी काम की तलाश में आया है। उधर आश्रय गृह के बाथरूम में पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं था। बाथरूम में पानी जमा था। साफ सफाई की भी समुचित व्यवस्था नहीं है। उसके अलावा आश्रय गृह में डस्टबिन तक नहीं है। उक्त कारण कचरा सीढ़ी के ठीक पास एक कोने में रखा हुआ था। आश्रय गृह के इंचार्ज ओबैदुल्लाह अंसारी ने बताया कि सभी बेड के लिए बेडशीट नहीं है। 20-25 बेड के लिए बेडशीट उपलब्ध है। बेडशीट के लिए नगर परिषद को लिखा गया है। अभी ठंड नहीं है। ठंड के दिनों में बस स्टैंड और रेलवे स्टैंड से रेस्क्यू किया जाता है। दरअसर आश्रय गृह श्मशान घाट के पास होने के कारण लोग यहां रहना भी पसंद नहीं करते हैं। रेस्क्यू कर यहां लाने के बाद अगले दिन ही भाग जाते हैं। आश्रय गृह में हर दिन औसतन पांच-सात लोग रहते हैं। महिला आश्रय गृह की इंचार्ज सुनिता पांडेय ने बताया कि आश्रय गृह में औसतन पांच छह महिलाएं रहती हैं। फिलहाल पांच महिलाएं हैं। हर दिन शाम को अक्सर रेस्क्यू नियमित रूप से किया जाता है। रेस्क्यू करने बाद भी महिलाएं आना नहीं चाहती हैं। सदर अस्पताल, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित अन्य जगहों पर भी रेस्क्यू किया जाता है। उन्होंने बताया कि आश्रय गृह में 50 महिलाओं के रहने की क्षमता है लेकिन 25 महिलाओं को ही रखने की व्यवस्था है। सभी बेड के लिए जरूरती चादर, कंबल और बेटशीट है।

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