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नक्सलियों ने जोनल कमांडर मृत्युंजय के नेतृत्व में बोला था धावा

नक्सलियों ने जोनल कमांडर मृत्युंजय के नेतृत्व में बोला था धावा

1 / 3प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि मंगलवार रात गढ़वा जिला के रमकंडा थाना क्षेत्र के बिराजपुर गांव हथियारबंद नक्सलियों का जत्था जोनल कमांडर मृत्युंजय के नेतृत्व में पहुंचा था। जत्थे ने सबसे पहले भंडरिया...

नक्सलियों ने जोनल कमांडर मृत्युंजय के नेतृत्व में बोला था धावा

2 / 3प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि मंगलवार रात गढ़वा जिला के रमकंडा थाना क्षेत्र के बिराजपुर गांव हथियारबंद नक्सलियों का जत्था जोनल कमांडर मृत्युंजय के नेतृत्व में पहुंचा था। जत्थे ने सबसे पहले भंडरिया...

नक्सलियों ने जोनल कमांडर मृत्युंजय के नेतृत्व में बोला था धावा

3 / 3प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि मंगलवार रात गढ़वा जिला के रमकंडा थाना क्षेत्र के बिराजपुर गांव हथियारबंद नक्सलियों का जत्था जोनल कमांडर मृत्युंजय के नेतृत्व में पहुंचा था। जत्थे ने सबसे पहले भंडरिया...

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मंगलवार रात गढ़वा जिला के रमकंडा थाना क्षेत्र के बिराजपुर गांव हथियारबंद नक्सलियों का जत्था जोनल कमांडर मृत्युंजय के नेतृत्व में पहुंचा था। जत्थे ने सबसे पहले भंडरिया थाना क्षेत्र के रोदो गांव स्थित बीड़ी पत्ता केंद्र पर पहुंचे। वहां एक मुंशी सहित दो को बंधक बनाया। उनकी पिटाई करते हुए केंद्र और स्कूल भवन में रखे गए करीब 100 मोरी बीड़ी पत्ता में आग लगा दी। उसके बाद नक्सली बिराजपुर गांव पहुंचे। वहां सरवर आलम को उसके घर से उठाया। बंधक बनाने के बाद उसकी पिटाई कर दी। गांव में ही माओवादियों ने बीड़ी पत्ता के अन्य मुंशी को बुलाकर उसकी पिटाई। आवाज सुनकर ग्रामीण भी जमा हो गए। लेवी नहीं देने की बात कहकर बिराजपुर गांव के केंद्र पर रखे गए 120 बोरी बीड़ी पत्ता में आग लगा दी। आग लगाने के लिए नक्सलियों से केरोसिन तेल की मांग की। तेल नहीं मिलने पर वहीं सूखे पत्तों की मदद से आग लगा दी। लेवी पहंुचाने की चेतावनी देते हुए बीड़ी पत्ता के सभी मुंशी को कुछ दूर ले जाकर चेतावनी देकर छोड़ दी। वहां से माओवादी रोदो गांव पहंुचे। वहां सड़क किनारे वाहनों में सो रहे मुंशी सहित सात लोगों को बंधक बनाकर पिटाई कर दी। उसके बाद सभी गाड़ियों में आग लगा दी।

रोदो गांव के ग्रामीण धर्मेंद्र सिंह, हीरा सिंह, महादेव सिंह, राजनाथ सिंह बताते हैं कि उनके गांव में यह पहली घटना है। ऐसी घटना वह दूसरे जगहों की सुनते थे। छह साल पहले 2012 में भंडरिया के सालो जंगल में बड़ी वारदात को नक्सलियों ने घटना को अंजाम दिया था। उसमें थानेदार सहित छह जवान शहीद हुए थे। उसके बाद थाना क्षेत्र में अमूमन शांति थी। पुलिस दावा कर रही थी कि अब क्षेत्र से नक्सली उजड़ गए। गांव में अंजाम देकर नक्सलियों ने अपनी वापसी के संकेत दिए हैं। उससे ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीणों ने कहा कि नक्सलियों के कमजोर पड़ने से क्षेत्र में कई विकास कार्य हुए। नक्सलियों की ओर से बाधित कई काम प्रशासन ने पूरा कराए। गांव आदिवासी बहुल है और करीब 400 की आबादी है। नक्सलियों की पिटाई के भुक्तभोगी गणेश परहिया, शंकर सिंह, धीरज सिंह और मनीष शर्मा ने बताया कि उनके साथ पहले ऐसी घटना नहीं घटी थी। घटना के बाद सभी भयभीत हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस 1.30 बजे घटनास्थल पर पहंुचकर जलते वाहन के आग पर काबू पाया।

भंडरिया थाना क्षेत्र में दो साल बाद नक्सलियों ने वारदात को अंजाम देकर अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है। नक्सलियों के गढ़ बूढ़ा पहाड़ में अभियान चलाकर उन्हें कमजोर करने का प्रयास किया गया। बूढ़ा पहाड़ में नक्सल विरोधी अभियान से बौखलाए माओवादियों ने अगस्त 2016 में भंडरिया थाना क्षेत्र के टेहरी गांव में तीन लोगों की हत्या पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर कर दी थी। उसके दो साल बाद नक्सली किसी घटना को अंजाम दे सके। उससे पहले 2010 में पंचायत चुनाव के दौरान चपिया मदगड़ी गांव में चुनाव कार्य में लगाए गए चार ट्रकों में माओवादियों ने आग लगा दी थी। वहीं 2013 में नक्सलियों ने थाना के चपलसी मोड़ से बिजका तक बनाए जा रहे सड़क निर्माण में लगे दो जेसीबी को भी फूंक दिया था। एक बार फिर से माओवादियों के वारदात से गांव के लोग दहशत में हैं।

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  • Web Title:Naxalites had attacked under the leadership of the zonal commander