पर्यटन स्थल का दर्जा मिलने के बाद भी आधारभूत संरचनाओं का नहीं हुआ विकास
फोटो केतार एक: नारायण वन स्थित सूर्य मंदिर झारखंड सरकार की ओर से घोषित पर्यटन स्थल मुकुंदपुर गांव के नारायण वन स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर और केतार स्थ

केतार, प्रतिनिधि। झारखंड सरकार की ओर से घोषित पर्यटन स्थल मुकुंदपुर गांव के नारायण वन स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर और केतार स्थित मां चतुर्भुजी मंदिर का अभी भी अपेक्षित विकास नहीं हुआ। लगभग दो वर्ष पूर्व ही पर्यटन स्थल का दर्जा नारायण वन स्थित सूर्य मंदिर को मिला। उसके बाद भी विकास के लिए आवंटन नहीं मिला। आवंटन नहीं मिलने के कारण नारायण वन स्थित सूर्य मंदिर में आधारभूत संरचनाओं का विकास नहीं हुआ। मंदिर विकास समिति के द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया है, लेकिन अभी बहुत सारा कार्य राशि के अभाव में ठप पड़ा हुआ है। मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष योगेंद्र कुमार सिंह और सचिव रविकांत चंद्रवंशी ने बताया कि इसे पर्यटन स्थल भले ही बना दिया गया हो, लेकिन धरातल पर उससे संबंधित कोई भी कार्य नहीं किया गया है।
अगर पर्यटन विभाग के द्वारा यहां पेयजल, तालाब निर्माण, भव्य छठ घाट, छठ व्रतियों के स्नान के लिए स्नानागार, चेंजिंग रूम, मंदिर परिसर की घेराबंदी, दुकान का निर्माण, मंदिर का सौंदर्यीकरण, मंदिर परिसर में चारों तरफ से हाई मास्क लाइट सहित अन्य कार्य करा दिया जाता तो मंदिर का सौंदर्य बढ़ जाता। साथ ही इस मंदिर से सरकार को हर वर्ष लाखों रुपए राजस्व की प्राप्ति होती।मालूम हो कि नारायण वन स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर आस्था का केंद्र है। जहां कार्तिक मास में छठ महापर्व मनाने के लिए कई राज्यों से छठ व्रतियों का आगमन मंदिर परिसर में होता है। मंदिर विकास समिति के लोगों ने बताया कि अगर पर्यटन विभाग के द्वारा मंदिर का सौंदर्यीकरण और मूलभूत सुविधाओं का विकास हो जाता तो आने वाले दिनों में युवाओं को उनके गांव में ही रोजगार का साधन उपलब्ध होता।::बाक्सःःमां चतुर्भुजी भगवती मंदिर को दो वित्तीय वर्ष में मिला 30 लाख रुपए:::पर्यटन स्थल का दर्जा मिलने के बाद मां चतुर्भुजी भगवती मंदिर के विकास के लिए दो वित्तीय वर्षों में लगभग तीस लाख रुपए आबंटित किए गए थे। उससे मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, पेयजल की व्यवस्था, मंदिर की चहारदीवारी सहित अन्य कार्य कराए गए हैं। मंदिर विकास समिति के पूर्व अध्यक्ष सह जिला पार्षद ज्वाला प्रसाद ने बताया कि पर्यटन विभाग से कुछ कार्य मंदिर में कराया गया था, लेकिन अभी भी मंदिर के बहुत सारे कार्य पैसों के अभाव में बंद है। वहीं मंदिर विकास समिति के निवर्तमान अध्यक्ष सह मुखिया प्रमोद कुमार और सचिव हेमंत पाठक ने बताया कि अगर पर्यटन विभाग के द्वारा पैसा उपलब्ध कराया जाता तो मुख्य पथ से मां चतुर्भुजी भगवती मंदिर तक सड़क का चौड़ीकरण और नाली का निर्माण, रामलीला मैदान की चहारदीवारी, मंदिर परिसर में पीसीसी ढलाई, भव्य विवाह मंडप का निर्माण सहित अन्य आवश्यक कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा कराया जाता जिससे मंदिर की भव्यता बढ़ जाती। उन्होंने कहा कि मां चतुर्भुजी भगवती मंदिर की ख्याति झारखंड सहित यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़ और बिहार में फैली हुई है। जहां से सालों भर श्रद्धालुओं का आगमन मंदिर में होता है। आने वाले दिनों में यह मंदिर झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में चिह्नित हो उसके लिए हम सभी लोगों को सामूहिक प्रयास करना होगा।
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