चेकडैम निर्माण कार्य में अनियमितता और वन संपदा का हो रहा दोहन
खरौंधी, प्रतिनिधि। प्रखंड क्षेत्र के झूरीबांध मूसहरवा डेरा में लाखों रुपये की लागत से बनाए जा रहे चेकडैम निर्माण कार्य में अनियमितता और वन संपदा के दो

खरौंधी, प्रतिनिधि।प्रखंड क्षेत्र के झूरीबांध मूसहरवा डेरा में लाखों रुपये की लागत से बनाए जा रहे चेकडैम निर्माण कार्य में अनियमितता और वन संपदा के दोहन का मामला सामने आया है। चेक डैम निर्माण कार्य में वन विभाग के ही पदाधिकारी नियमों की अनदेखी करते हुए स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों के साथ मिलकर पास के जंगलों से बड़े पैमाने पर पत्थरों की अवैध निकासी करवा रहे हैं। ट्रैक्टरों के माध्यम से जंगल से पत्थर निकालकर चेक डैम निर्माण में उपयोग किया गया। यह वन अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है।स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में उसे लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि जहां एक ओर आम लोगों को जंगल से लकड़ी, पत्थर या अन्य संसाधन लेने पर सख्त कार्रवाई की जाती है, वहीं विभाग के लोग स्वयं नियमों को ताक पर रखकर अवैध कार्यों को अंजाम दे रहे हैं।
उससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं जंगल से किसी भी प्रकार की प्राकृतिक संपदा जैसे लकड़ी, पत्थर आदि का बिना अनुमति दोहन करना वन अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर भारतीय वन अधिनियम 1927 और भारतीय न्याय संहिता के तहत भारी जुर्माना के साथ जेल तक का प्रावधान है। उसके बावजूद यदि विभागीय अधिकारी ही इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त पाए जाते हैं, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। नियमों के अनुसार वन क्षेत्र में किसी प्रकार की योजनाओं के निर्माण कार्य के लिए आवश्यक सामग्री जैसे पत्थर और बालू अधिकृत दुकान से रॉयल्टी देकर ही लेना है। उससे न केवल सरकारी राजस्व की सुरक्षा होती है, बल्कि पर्यावरण संतुलन भी बना रहता है। उसके विपरीत झूरीबांध में चल रहे चेक डैम निर्माण में इन नियमों की अनदेखी किए जाने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो जंगलों का व्यापक नुकसान हो सकता है। यह मामला न केवल वन संपदा की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कदम उठाता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।बॉक्स::अधिकृत दुकान रॉयल्टी संबंधित कागजात लेकर सरकार को राजस्व देते हैं। उसके बदले अब तक चेक डैम निर्माण में पत्थर स्थानीय जंगल से निकलवा कर ही लगवाते हैं। अबतक यह व्यवस्था है। प्रमोद कुमार, रेंजर
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