Hindi NewsJharkhand NewsGarhwa NewsInternal Conflicts Emerge in BJP Over Suraj Gupta s Facebook Post on OBC Representation
सोशल मीडिया पर भाजपा नेता के पोस्ट से अंतर्विरोध शुरू

सोशल मीडिया पर भाजपा नेता के पोस्ट से अंतर्विरोध शुरू

संक्षेप: गढ़वा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी सूरज गुप्ता ने फेसबुक पर एक पोस्ट में ओबीसी, दलित और आदिवासी परिवारों के राजनीतिक संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1967 के बाद इन समुदायों का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया है। उनके पोस्ट के बाद पार्टी में अंतर्विरोध शुरू हो गए हैं, जिसमें अन्य नेताओं ने प्रतिक्रिया दी।

Sat, 1 Nov 2025 04:35 PMNewswrap हिन्दुस्तान, गढ़वा
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गढ़वा, संवाददाता। गढ़वा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी और भाजपा नेता सूरज गुप्ता की ओर से फेसबुक पर किए गए एक पोस्ट से पार्टी के अंदर अंतर्विरोध सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा कि गढ़वा विधानसभा की राजनीति में ओबीसी, दलित और आदिवासी गरीब परिवार के लोगों ने संघर्ष कर 1967 में लक्ष्मी प्रसाद केसरी को विधायक बनाया था। उनके बाद गढ़वा विधानसभा के राजनीति में लगभग 58 साल से एसटी, एससी, ओबीसी का प्रतिनिधित्व बिल्कुल शून्य हो गया है। अब हर चुनाव के दौरान विभिन्न दलों से ओबीसी समाज प्रयास खूब करता है, परंतु तत्कालीन परिस्थितियां या दलीय बाध्यता की वजह से सफलता नहीं मिलती।

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इसका मतलब यह नहीं कि हमलोग हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाएं। अवसरवादी विचारधारा का जादू चलता रहे और हमलोग अपने भविष्य अथवा आने वाली पीढ़ी को गुलामी की जंजीरों में जकड़ दें। यह सच्चाई है कि यदि वर्तमान पीढ़ी अपने हक और अधिकार तथा प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष / प्रयास नहीं करेगी तो आने वाली पीढ़ी कभी हमलोगों को माफ नहीं करेगा। सफलता मिले या न मिले संघर्ष जारी रखना चाहिए। जबतक जिंदा रहूंगा इस अभियान को आगे बढ़ाने की कोशिश करता रहूंगा। उन्होंने लोगों से इस अभियान में समर्थन की अपील की है। उनके इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया में अंतर्विरोध शुरू हो गया है। इस पोस्ट के बाद मुन्ना तिवारी ने लगातार तीन पोस्ट किए। बिना किसी का नाम लिए पहले पोस्ट में लिखा भाजपा में राजनीति कर रहे हैं तो टेस्ट क्रिकेट जैसा टिक रहिए। यहां हिंदू बनकर राजनीति करिए। नहीं तो अपनी राजनीति का पतन कर लीजिएगा। भाजपा का कुछ नहीं होने वाला है। यह भ्रम दिमाग से हमेशा के लिए निकाल दीजिए। फिर लिखा भवनाथपुर के दो और मझिआंव के एक भाजपा नेता को लगने लगा कि पार्टी से बड़ा हो गए। चुनाव लड़े तो हजार वोट नहीं ला पाए। जिला कार्यालय में इस प्रकार बोलता था जैसे सब वोट उनके पास ही रखल बा। दोनों ही व्यक्ति के पोस्ट में पार्टी समर्थक और अन्य लोग भी अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।