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खराब पड़े 2111 चापाकलों को दुरूस्त करने का निर्देश, 77 क्षेत्र हैं सुखाग्रस्त

फोटो मझिआंव दो: बरडीहा प्रखंड के सलगा में खराब पड़ा जलमीनार जिलांतर्गत पड़ रही भीषण गर्मी में जिला मुख्यालय सहित कई इलाकों में जलसंकट गहरा गया है।...

खराब पड़े 2111 चापाकलों को दुरूस्त करने का निर्देश, 77 क्षेत्र हैं सुखाग्रस्त
हिन्दुस्तान टीम,गढ़वाTue, 28 May 2024 02:00 AM
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गढ़वा, हिटी। जिलांतर्गत पड़ रही भीषण गर्मी में जिला मुख्यालय सहित कई इलाकों में जलसंकट गहरा गया है। कई जगहों पर जलमीनार और चापाकल खराब होने के कारण पानी के लिए लोग त्राहिमाम कर रहे हैं। कुल इलाकों में चापाकल खराबी के कारण लोग परंपरागत कुआं या चुआंड़ी के भरोसे पानी का बंदोबस्त कर रहे हैं।
उधर पीएचइडी का दावा है कि गर्मी शुरू होने के साथ ही जलसंकट की संभावना को देखते हुए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने तैयारी शुरू कर दी थी। उसके बावजूद अब तक जिले भर में 2111 चापाकल खराब पड़े हैं। विभागीय स्तर पर जिले में खराब पड़े सभी चापाकलों की सूचना देने के लिए टोल फ्री नंबर जारी भी किया गया है। उसके बाद भी खराब पड़े चापाकलों की संख्या कम नहीं हो रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार विभागीय स्तर पर खराब पड़े चापाकलों की लगातार दुरूस्त किया जा रहा है। वहीं गर्मी में जलस्तर नीचे जाने के कारण पहले से चालू हालत में मौजूद दूसरे चापाकल से पानी निकलना बंद हो जा रहा है। चापाकलों को दुरूस्त करने के लिए प्रत्येक प्रखंडों में अलग-अलग गैंग को प्रतिनियुक्त किया गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अंतर्गत जिले के सभी 20 प्रखंडों में कुल 17 हजार 274 चापाकल हैं। उनमे से 15 हजार 163 चापाकल चालू हैं जबकि दो हजार 111 चापाकल विभिन्न कारणों से खराब हो गए हैं। सभी को त्वरित गति में दुरूस्त करने का निर्देश दिया गया है ताकि गर्मी के दौरान लोगों को किसी भी तरह की कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। विभागीय आंकड़ों के अनुसार गढ़वा प्रखंड में 250, डंडा में 42, रंका में 152, रमकंडा में 69, चिनियां में 72, मेराल में 180, डंडई में 108, मझिआंव में 118, बरडीहा में 75, कांडी में 185, भंडरिया में 92, बड़गड़ में 87, नगर ऊंटारी में 117, रमना में 116, विशुनपुरा में 55, धुरकी में 100, सगमा में 55, भवनाथपुर में 109, केतार में 63 और खरौंधी में 66 चापाकल खराब हैं। उन्हें दुरूस्त करने का निर्देश दिया गया है। वहीं निर्माणाधीन योजना को तेज गति से पूरा करने का निर्देश दिया गया है। हर घर नल योजना के तहत जिले में 1851 योजनाएं निर्माणाधीन हैं। विभाग के पास इसी वर्ष दिसबंर माह तक उक्त योजनओं को पूरा कराने की चुनौती है। विभागीय आकड़ों के अनुसार पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अंतर्गत जिले में तीन तरह की योजनाएं संचालित की जा रही है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अंतर्गत जिले में हर घर नल योजना के तहत कुल 4124 योजनाएं है। उनमें 2273 योजनाएं पूरा व चालू कर दिया गया है। वहीं 1851 योजनाएं निर्माणाधीन हैं। उक्त योजनाओं को धरातल पर उतारकर दो लाख 98 हजार 535 घरों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अबतक एक लाख 91 हजार 631 घरों तक पानी पहुंचा दिया गया है। शेष एक लाख छह हजार 904 घरों तक पानी पहुंचाना बाकी रह गया है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सर्वेक्षण के दौरान जिले के 77 क्षेत्र सुखाग्रस्त पाए गए हैं जहां पर पानी की अधिक किल्लत है। उक्त क्षेत्र में अन्य एरिया से अधिक गहराई में पानी है। उक्त कारण उक्त क्षेत्र को विभागीय स्तर पर सुखाग्रस्त क्षेत्र की श्रेणी में रखा गया है। पीएचइडी के नजर में रंका प्रखंड के खपरो, मानपुर, खरडीहा, सलेया, कंचनपुर, तेतरडीह, तेनुडीह, सेराशाम और डाले सुखाग्रस्त क्षेत्र की श्रेणी में है। इसी तरह रमकंडा प्रखंड के उदयपुर, चेटे, सूली, पटसर, बलिगढ़ और रमकंडा, चिनियां के छतैलिया, राजबांस, खुर्री, नकसिली और मसरा, भंडरिया प्रखंड के रोदो, मंजरी, पर्रो, पार्ट, मरदा, बड़गड़ के मुटकी, सरूअत पहाड़, टेहरी, हेसातू, गड़िया, गढ़वा प्रखंड के तेनार, ओबरा, बघमार, मसूरिया, करमडीह, डुमरो, कितासोती कला, रंका, पिपरा, कल्याणपुर, संग्रहेखूर्द, सिदेखूर्द, लोटो, नगर उंटारी के गरबांध, उसका कला, मर्चवार, अधौरी, रमना के अधौरी, भवनाथपुर के कोणमंडरा, डगर, मकरी गड़ेरियाडीह, तुलसीदामर और झुमरी, सगमा के लोलकी और खास, धुरकी के खाला, परासपानी कला, खरौंधी के मझिगांवा खास और परसवार, मेराल के औरेया, खोरीडीह, चेचरिया, पचफेड़ी, टिकुलडीहा, सिकनी, बिकताम सुंगन्डी टोला, करमाही, कुशमही, डंडई के लवाही कला, बेलवाटीकर, महुडंड, मझिआंव के करमडीह, भुसुआ, बिडंडा, सरकोनी, बूढ़ीखांड़ और बरडीहा के बरडीहा एरिया के कुछ क्षेत्र को सुखाग्रस्त क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।

गर्मी को देखते हुए विभाग ने पहले से ही अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। जिले के खराब पड़े सभी चापाकलों को दुरूस्त करने का निर्देश दे दिया गया है। गर्मी के दिनों में पानी का लेयर नीचे चले जाने के कारण अन्य दिनों की अपेक्षा इस मौसम चापाकल अधिक खराब होता है। ऐसे में खराब हो रहे चापाकलों की लगातार दुरूस्त भी किया जा रहा है। जल्द ही सभी खराब पड़े चापाकलों को दुरूस्त कर लिया जाएगा। प्रदीप कुमार, कार्यपालक अभियंता पीएचईडी

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