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17 नवंबर, 2020|6:48|IST

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गढ़वा: 189 पंचायतों में सिर्फ 78 पंचायत सेवक

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जिलांतर्गत कुल 20 प्रखंडों में कुल 189 पंचायत हैं। उनमें मात्र 78 पंचायतों में ही पंचायत सेवक हैं। 111 पंचायतों का कामकाज पंचायत सेवकों के प्रभार के भरोसे चल रहा है। पंचायत सेवकों की कमी का आलम यह है कि एक पंचायत सेवक के पास दो-तीन पंचायतों का भी प्रभार है।

पंचायत सेवकों की कमी के कारण पंचायत स्तर के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। पंचायत स्तर के लगभग सभी कार्य पंचायत सेवकों को ही करना पड़ता है। उक्त कारण आम लोगों को अपना कार्य कराने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

बताया जाता है कि जिलांतर्गत खरौंधी प्रखंड में कुल नौ पंचायत हैं। उनमें महज तीन पंचायतों में ही पंचायत सेवक हैं। प्रखंड में छह पंचायतों में पंचायत सेवक का पद प्रभार के भरोसे चल रहा है। उसी तरह केतार में सात की जगह तीन पंचायतों में ही पंचायत सेवक कार्यरत हैं। केतार में चार पंचायत प्रभार में चल रहा है।

भवनाथपुर में नौ में चार पंचायत सेवक कार्यरत हैं। यहां भी पांच पंचायत प्रभार में चल रहा है। कांडी में कुछ 16 पंचायतों में सिर्फ आठ पंचायत में पंचायत सेवक हैं। उसी तरह बरडीहा में छह पंचायत में तीन पंचायत सेवक कार्यरत हैं। मझिआंव में कुल नौ पंचायत में सिर्फ एक पंचायत में ही पंचायत सेवक कार्यरत हैं। प्रखंड के आठ पंचायत में पंचायत सेवक का पद रिक्त है।

विशुनपुरा में पांच पंचायत में तीन में पंचायत सेवक कार्यरत है। रमना में 11 पंचायत में सिर्फ पांच पंचायतों में ही पंचायत सेवक कार्यरत हैं। उसी तरह नगरऊंटारी प्रखंड के कुल 12 पंचायतों में पांच पंचायत में ही पंचायत सेवक कार्यरत हैं। वहीं सगमा में पांच पंचायतों में से तीन में ही पंचायत सेवक कार्यरत हैं। उसी तरह जिलांतर्गत धुरकी प्रखंड के आठ पंचायतों में से तीन में ही पंचायत सेवक कार्यरत हैं।

डंडई प्रखंड के नौ में से चार में ही पंचायत सेवक कार्यरत हैं। उसी तरह चिनियां प्रखंड में सात में से तीन में ही पंचायत सेवक कार्यरत है। वहीं मेराल प्रखंड में 20 में से सात में ही पंचायत सेवक कार्यरत हैं। उसी तरह सदर प्रखंड गढ़वा में 22 पंचायतों में से सिर्फ सात पंचायत में ही पंचायत सेवक कार्यरत हैं। शेष 13 पंचायत प्रभार के भरोसे चल रहा है। डंडा में तीन पंचायतों में दो में पंचायत सेवक कार्यरत हैं। वहीं रंका प्रखंड में 14 में से पांच पंचायतों में पंचायत सेवक कार्यरत है। रमकंडा में सात में दो पंचायत में ही पंचायत सेवक कार्यरत हैं।

भंडरिया में छह में से तीन और बड़गड़ प्रखंड में चार पंचायत में से तीन में ही पंचायत सेवक कार्यरत हैं। पंचायतों में पंचायत सेवक के भरोसे मनरेगा की योजना के अलावा सभी तरह के विकास कार्य, वृद्धा, निशक्तता और विधवा पेंशन, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र सहित अन्य तरह के कार्य चल रहे हैं। पंचायतवार पंचायत सेवक नहीं होने से सभी तरह के कार्यों पर प्रतिकुल असर पड़ रहा है।

एक पंचायत सचिव के जिम्मे है नौ पंचायत

प्रखंड में कुल 9 ग्राम पंचायत और नगर पंचायत क्षेत्र में प्रखंड के तीन पंचायतों को शामिल किया गया है। नौ ग्राम पंचायत में एक मात्र पंचायत सचिव शिवशंकर ठाकुर हैं। उनके जिम्मे मोरबे, खरसोता और तलशबरिया पंचायत है। बाकी तीन जन सेवक और एक एलइओ बाकी पंचायत का प्रभार दिया गया है। जन सेवक राजगृह कुमार को बोदरा पंचायत और रामपुर पंचायत का प्रभार दिया गया है। वहीं जन सेवक सुरेश कुमार सिंह को सोनपुरवा और करमडीह पंचायत का पंचायत सचिव का प्रभार दिया गया है। वहीं जन सेवक परमानंद प्रसाद को टरहे और पुरहे पंचायत का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। उसी तरह एलइओ राजकुमारी सिन्हा को नपं क्षेत्र का प्रभार दिया गया है। पंचायतवार पंचायत सचिव नहीं रहने से कामकाज पर असर पड़ रहा है। तलशबरिया पंचायत के राजेंद्र राम, खरसोता पंचायत निवासी ओम प्रकाश मेहता, अजय यादव ने बताया कि एक काम के लिए महीनों प्रखंड कार्यालय से लेकर पंचायत सचिव तक चक्कर काटना पड़ता है।

जिले में पंचायत सचिव के रिक्त पदों को लेकर राज्य सरकार से पत्राचार किया जाएगा। पंचायत सचिवों के रिक्त पदों पर बहाली से पंचायत स्तर के कार्यों में गति मिलेगी। पंचायत सचिवों की कमी दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

राजेश कुमार पाठक, डीसी।

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