
सीएचसी धुरकी से दुमका-पाकुड़ के लोग बच्चों का बनवा रहे जन्म प्रमाण पत्र
धुरकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दूसरे जिलों के लोग अपने बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। बिचौलियों और सीएचसी कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी प्रमाण पत्र बन रहे हैं, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में त्रुटियां और पहचान दस्तावेजों के दुरुपयोग का खतरा बढ़ रहा है।
धुरकी, प्रतिनिधि। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से दूसरे जिल सूबे के दुमका-पाकुड़ के लोग भी अपने बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं। दूसरे जिले लोगों द्वारा बच्चों के नाम पर भी जन्म प्रमाण पत्र सीएचसी के कुछ कर्मचारियों और बाहरी बिचौलियों की मिलीभगत से बनवा रहे हैं। जांच हो तो फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के मामले का भंडाफोड़ हो सकता है। बताया जाता है कि इस काम में संलिप्त बिचौलिया बाहर के जिलों के लोगों से व्हाट्सएम से बच्चे का नाम सहित अन्य जरूरी जानकारी मंगवाते हैं। उसके बाद सीएचसी कर्मी के मिलीभगत से उनका जन्म प्रमाण पत्र बना दिया जाता है।
उसके लिए 300 से 500 रुपये का भुगतान कर्मी को किया जाता है। बिचौलियों से उक्त राशि मिलते ही कुछ समय में ही जन्म प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। उससे सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर त्रुटियां पैदा हो रही हैं। पहचान से संबंधित दस्तावेजों के दुरुपयोग का खतरा भी बढ़ रहा है। जन्म प्रमाण पत्र का आधार कार्ड, स्कूल नामांकन, सरकारी योजनाओं और नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इसका फर्जी इस्तेमाल बड़े पैमाने होने की संभावना है। सीएचसी से 15 नवंबर को पाकुड़ जिलांतर्गत आलूबेरा गांव निवासी गायना मुर्मू ने दुलाद मुर्मू के नाम से जन्म प्रमाण पत्र बनवाया। उसका जन्म तिथि 7 मार्च 2018 है। जन्म धुरकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दिखाया गया है। उसी तरह पाकुड़ जिलांतर्गत उसी गांव निवासी गोमेश टुडू ने अंशु प्रिया टुडू के नाम से प्रमाण पत्र बनवाया है। उसका जन्म 15 अगस्त 2016 को सीएचसी में ही दिखाया गया है। वहीं रामे मुर्मू ने पुनम मुर्मू के नाम से प्रमाण पत्र बनवाया है।

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