
नीलगाय के आतंक से परेशान किसान छोड़ रहे खेती
कांडी के किसान नीलगाय के आतंक से परेशान हैं और खेती करने की उम्मीद छोड़ चुके हैं। कई किसान अब सरसों और हल्दी जैसी फसलें उगाने लगे हैं, क्योंकि नीलगाय इन फसलों को कम नुकसान पहुँचाते हैं। बंजर पड़ी भूमि के बावजूद, किसान अपने बल पर खेती कर रहे हैं, लेकिन महंगाई और नीलगाय के कारण उनकी मेहनत बर्बाद हो रही है।
कांडी, प्रतिनिधि। प्रखंड के किसान अब नीलगाय के आतंक से छुटकारा मिलने की उम्मीद छोड़ चुके हैं। अब प्रखंड के किसान या तो खेती करना छोड़ चुके हैं या तो खेती का स्वरूप बदल दिए हैं। किसान भोला मेहता, संजय मेहता, सर्जक राज मेहता, श्रीराम पांडेय, सुरेंद्र यादव सहित अन्य किसानों ने बताया कि खेती करना मुश्किल है। कड़कड़ाती ठंड में भी रात दिन एक कर अपनी फसलों की रखवाली करना पड़ रहा है फिर भी नीलगाय आकर फसलों को चट कर जा रहे हैं। अधिसंख्य किसान मचान बनाकर रातों में भी फसलों की रखवाली करने को लाचार हैं। नीलगाय के कारण प्रखंड के हजारों हेक्टेयर उपजाऊ जमीन बंजर व परती पड़ा हुआ है।
किसानों ने कहा कि जब हमारे यहां नीलगाय नहीं आते थे तो प्रखंड की एक-एक इंच जमीन पर खेती होती थी, लेकिन आज स्थिति ऐसी हो गई है कि प्रखंड की अधिसंख्य भूमि बंजर पड़ी हुई है। अब यहां के किसान वैसी फसल अपने खेतों में लगा रहे हैं जिसे नीलगाय अधिक नुकसान नहीं पहुंचाते। किसान अपने खेतों में सरसों की खेती करना शुरू कर दिए हैं। उसको नीलगाय कम नुकसान पहुंचाते हैं। उधर कोयल व सोन तटीय क्षेत्रों में किसान अब व्यवसायिक फसल हल्दी की फसल उगा रहे हैं। हल्दी को भी नीलगाय नुकसान नहीं पहुंचाते। सरसों व हल्दी की फसल उगाकर मुनाफा भी अधिक प्राप्त कर रहे हैं। किसानों ने कहा कि एक तो प्रखंड में सिंचाई की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है फिर भी यहां के किसान अपने बाहुबल से फसल उगा भी रहे हैं, तो वह खेती नीलगाय के भेंट चढ़ जा रहा है। महंगाई के दौर में खाद, बीज व मजदूरी लगाकर खेती कर रहे हैं लेकिन नीलगाय के कारण सब बर्बाद हो जा रहा है।

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