
मुआवजा के बदले डंडे के जोर से सड़क बनाने का आरोप, डीसी से की शिकायत
ग्रामीणों ने डीसी और एसपी को दिया आवेदन जिलांतर्गत अरंगी क्षेत्र में सड़क निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। गांव के 50 से अधिक किसानों ने उपायुक्त,
गढ़वा, प्रतिनिधि। जिलांतर्गत अरंगी क्षेत्र में सड़क निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। गांव के 50 से अधिक किसानों ने उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और एसडीएम को संयुक्त आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उनकी रैयती जमीन पर बिना मुआवजा दिए और स्वीकृत नक्शे से हटकर जबरन सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। विरोध करने पर किसानों को झूठे मुकदमे में फंसाने और पुलिस कार्रवाई की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। मुआवजा के बदले डंडे के जोर पर सड़क बनवाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने पहले मेराल थाना में आवेदन देकर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी।
उसके बाद गुरुवार को डीसी और एसपी कार्यालय में लिखित आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। किसानों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए उनकी जमीन की दर्जनों बार मापी कराई गई, लेकिन इसके बावजूद स्वीकृत नक्शे की अनदेखी करते हुए सड़क को दूसरी दिशा में उनकी खेती योग्य भूमि से गुजारा जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता और मेराल अंचल अधिकारी ने तीन महीने के भीतर मुआवजा दिलाने का लिखित आश्वासन दिया था। उसी भरोसे पर किसानों ने विरोध नहीं किया और उनके खेतों में बालू व मिट्टी डालकर सड़क का प्रारंभिक कार्य करा दिया गया। लेकिन आश्वासन के छह महीने बीत जाने के बाद भी न तो मुआवजा मिला और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई। किसानों का आरोप है कि जब वह मुआवजे की मांग करते हैं या निर्माण कार्य पर आपत्ति जताते हैं तो संबंधित अधिकारी और निर्माण करा रही एजेंसी के लोग उन्हें डराने-धमकाने लगते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें केस में फंसाने और जबरन काम चलाने की धमकी दी जा रही है। उससे गांव में भय का माहौल है। आवेदन देने वाले किसानों ने डीसी से मांग की है कि जब तक उनकी जमीन का उचित मुआवजा नहीं दिया जाता, तब तक सड़क निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता, मेराल सीओ और निर्माण करा रही एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वह आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि विकास के नाम पर किसानों के हक और जमीन को कुचला जाना किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आवेदन सौंपने वाले ग्रामीणों में इंद्रदेव महतो, ममता देवी, संतोष कुमार, महावीर राम, कुलेंद्र मेहता, पप्पू कुमार, दीनानाथ राम, सूरजदेव मेहता, श्रीराम कुशवाहा, राजदेव कुमार, संतोष पासवान, गंगा महतो सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं।

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