
बजट पर उद्योग जगत की मिली-जुली प्रतिक्रिया, दिखा उम्मीद और निराशा दोनों रंग
फोटो संख्या तीन: रविवार को मेनरोड में बजट का सीधा प्रसारण देखते चैंबर अध्यक्ष बबलू पटवा व अन्य लोग रविवार को सदन में केंद्रीय बजट पेश होते ही जिले के
गढ़वा, प्रतिनिधि। रविवार को सदन में केंद्रीय बजट पेश होते ही जिले के औद्योगिक और कारोबारी हलकों में हलचल तेज हो गई। सत्तापक्ष और विपक्ष ने बजट पर मिली जुली प्रतिक्रिया व्यक्त की है। चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष बबलू पटवा ने शहर के मेन रोड स्थित अपने प्रतिष्ठान में बजट भाषण के दौरान सदस्य बड़ी स्क्रीन पर नजरें टिकाए बैठे रहे। जैसे ही पुरानी योजनाओं के लिए आवंटन जारी रखने और कुछ में बढ़ोतरी की घोषणा हुई, सभागार में तालियों की गूंज सुनाई दी। खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) से जुड़ी योजनाओं को निरंतर समर्थन मिलने को सकारात्मक संकेत माना गया।
रेलवे के लिए घोषित प्रोजेक्ट्स ने भी खासा ध्यान खींचा। झारखंड से गुजरने वाले रूटों के आधुनिकीकरण, स्टेशन विकास और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने की घोषणाओं का चैंबर सदस्यों ने स्वागत किया। उद्योगपतियों का मानना है कि इससे राज्य में खनन, स्टील और सीमेंट जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। हालांकि, कुछ सदस्यों के चेहरे तब उतरे नजर आए जब टैक्स में तत्काल बड़ी राहत की उम्मीद पूरी नहीं हुई। बजट की सबसे अधिक सराहना इंफ्रास्ट्रक्चर पर निरंतर फोकस और स्टार्टअप इकोसिस्टम को प्रोत्साहन देने वाली घोषणाओं को लेकर हुई। वहीं, सबसे ज्यादा आलोचना पेट्रोलियम उत्पादों और कच्चे माल पर लागत घटाने को लेकर ठोस कदमों की कमी पर देखी गई। जैसे-जैसे भाषण आगे बढ़ा, कभी खुशी तो कभी मायूसी के भाव सभागार में साफ झलकते रहे। बजट के तुरंत बाद चैंबर के प्रमुख पदाधिकारियों ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट “स्थिरता और निरंतरता” का बजट है। उनके अनुसार बड़े सुधारों से ज्यादा इस बार मौजूदा योजनाओं को मजबूती देने पर जोर दिया गया है, जो दीर्घकाल में उद्योगों के लिए फायदेमंद हो सकता है। चैंबर के पदाधिकारियों ने भी एमएसएमई के लिए ऋण, गारंटी और तकनीकी उन्नयन से जुड़े प्रावधानों का स्वागत किया, लेकिन बिजली और लॉजिस्टिक्स लागत पर और राहत की मांग दोहराई। अलग-अलग सेगमेंट की बात करें तो ऑटोमोबाइल कारोबारियों ने ईवी और वैकल्पिक ईंधन से जुड़ी नीतियों को सकारात्मक बताया, जबकि पारंपरिक वाहन कारोबार से जुड़े लोग मांग में तुरंत उछाल को लेकर संशय में दिखे। इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर ने मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाले कदमों की सराहना की। सर्राफा कारोबारियों ने सीमा शुल्क और कर ढांचे में बड़े बदलाव न होने पर संतोष जताया, वहीं रियल एस्टेट कारोबारियों को किफायती आवास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ने से मांग बढ़ने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, यह बजट न तो पूरी तरह उत्साह से भरा है और न ही निराशाजनक बल्कि उद्योग जगत इसे संभावनाओं और अपेक्षाओं के संतुलन के रूप में देख रहा है।

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