जिले को कुष्ठ रोग मुक्त बनाने का संकल्प, स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान की हुई शुरुआत
गढ़वा में कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 30 जनवरी से 14 फरवरी तक स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। गोष्ठी में सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ केनेडी ने कुष्ठ रोग को उपचार योग्य बताया और स्वास्थ्य कर्मियों को कुष्ठ रोग उन्मूलन की शपथ दिलाई। अभियान में समाज की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया गया।

गढ़वा, प्रतिनिधि। कुष्ठ रोग के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने, समय पर पहचान और प्रभावी उपचार के माध्यम से जिले को कुष्ठ रोग मुक्त बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान 2026 के सफल संचालन को लेकर सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रत्येक वर्ष महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित किया गया। मौके पर सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ केनेडी और उपस्थित लोगों ने महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उसके पश्चात चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मियों को कुष्ठ रोग उन्मूलन की शपथ दिलाई गई।
गोष्ठी में सिविल सर्जन ने कुष्ठ उन्मूलन के क्षेत्र में सराहनीय कार्य के लिए सदर अस्पताल गढ़वा के फिजियोथैरेपिस्ट अभिषेक सिंह को सम्मानित किया। उनके द्वारा लगातार कुष्ठ रोगियों की फिजियोथैरेपी कर अब तक 12 रोगियों को दिव्यांगता से बचाया गया है। उसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रंका के पैरामेडिकल वर्कर तरुण कुमार विश्वास को भी बेहतर कार्य के लिए सम्मानित किया। गोष्ठी में सिविल सर्जन ने कहा कि कुष्ठ रोग कोई अभिशाप नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है। आवश्यकता केवल समय पर पहचान, नियमित उपचार और समाज के सहयोग की है। उन्होंने कहा कि जागरूकता के अभाव में आज भी कई लोग इलाज से वंचित रह जाते हैं, जिसे अभियान के माध्यम से दूर किया जाएगा। बताया गया कि स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान का संचालन जिले में 30 जनवरी से 14 फरवरी तक किया जाएगा। उसके बाद कुष्ठ रोगी खोज अभियान (चक्र-2) के तहत 9 मार्च से 23 मार्च तक जिले भर में घर-घर जाकर संभावित कुष्ठ रोगियों की पहचान की जाएगी ताकि उन्हें समय रहते इलाज से जोड़ा जा सके। अभियान के दौरान ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। ग्रामसभा, पंचायत प्रतिनिधियों, सभी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों एवं शैक्षणिक संस्थानों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। विद्यालय स्तर पर छात्रों के माध्यम से जागरूकता फैलाने के लिए क्विज, निबंध एवं अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताओं के आयोजन के निर्देश भी दिए गए। अभियान के अंतर्गत कुष्ठ रोग से मुक्त हो चुके व्यक्तियों को सम्मानित कर उन्हें समाज में प्रेरणा और जागरूकता का माध्यम बनाया जाएगा।

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