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वर्षाजल का समुचित प्रबंधन कर क्षेत्र का सर्वागीण विकास संभव: डीसी वर्षा जल का समुचित प्रबंधन कर क्षेत्र का सर्वांगीण विकास संभव: डीसी

गढ़वा व चिनियां के 45 गांवों में जलछाजन का चल रहा है कार्य झारखंड राज्य जलछाजन मिशन के तहत मंगलवार को समाहरणालय के सभागार में डीसी सह जलछाजन मिशन...

वर्षाजल का समुचित प्रबंधन कर क्षेत्र का सर्वागीण विकास संभव: डीसी वर्षा जल का समुचित प्रबंधन कर क्षेत्र का सर्वांगीण विकास संभव: डीसी
हिन्दुस्तान टीम,गढ़वाWed, 08 Nov 2023 12:15 AM
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गढ़वा, प्रतिनिधि
झारखंड राज्य जलछाजन मिशन के तहत मंगलवार को समाहरणालय के सभागार में डीसी सह जलछाजन मिशन के अध्यक्ष शेखर जमुआर की अध्यक्षता में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। वहीं जलछाजन अभियान को लेकर बनाए गए गीत हम पानी को बचायेंगे, हम माटी को बचायेंगे, हम जंगल को बचायेंगे, हम धरती मां के बच्चे, अपनी माता को बचायेंगे... प्रस्तुत किया गया। मौके पर डीसी ने कहा कि जलछाजन एक भूजलीय इकाई है, जहां विभिन्न स्रोतों से एकत्रित जल एक साझा बिंदु से प्रवाहित होकर नदी नालों में बहकर चला जाता है। झारखंड की भौगोलिक संरचना विशेष कर गढ़वा जिला जहां अनियमित वर्षा के कारण अधिकांश क्षेत्र सूखा और कृषि कार्य को प्रभावित करती है, जिसके कारण जलछाजन कार्यक्रम की प्रासंगिताकता और भी बढ़ जाती है। कार्यक्रम द्वारा संसाधनों का उपयोग और वर्षा जल का समुचित प्रबंधन कर ग्रामीण क्षेत्र का सर्वागीण विकास संभव है।

उन्होंने कहा कि वर्षा जल के समुचित प्रबंधन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सामूहिक रूप से प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जलछाजन परियोजना से क्षेत्र के सभी ग्रामीण इससे लाभान्वित हों यही कामना है। कार्यशाला में जलछाजन कार्यक्रम के उद्देश्य की जानकारी भी दी गई। उनमें जल, जंगल, जानवर, जन व जमीन का उचित संरक्षण व विकास करना, पारिस्थितिकी में सही संतुलन स्थापित करना, मिट्टी के कटाव को रोकना, प्राकृतिक वनस्पतियों को पुनर्जीवित करना, वर्षा जल का संरक्षण, भूजल को बढ़ावा देना, मिश्रित खेती और खेती के नई तकनीकों को बढ़ावा देना, टिकाउ जीविकोपार्जन पद्धति को बढ़वा देने की जानकारी दी गई। मौके पर जिला तकनीकि विशेषज्ञ जलछाजन प्रमोद सेठ ने गढ़वा जिला अंतर्गत संचालित जलछाजन के परियोजनाओं की जानकारी दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और झारखंड राज्य जलछाजन योजना, यह दो योजनाएं अंतर्गत जिले के गढ़वा और चिनियां प्रखंड में कार्य किया जा रहा है। दोनों प्रखंडों के 45 गांवों में 11066.98 हेक्टेयर भूमि में ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत जलछाजन परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। उसके तहत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, आजीविका समवर्धन, उत्पादन क्षमता प्रणाली जैसे घटको के माध्यम से कृषि उत्पादन और आय में बढ़ोतरी होगी। साथ ही बताया कि जलछाजन के क्षेत्र में झारखंड राज्य में गढ़वा जिला को अच्छे कार्य करने में दूसरा स्थान प्राप्त है। साथ ही बताया गया कि गढ़वा और चिनियां प्रखंड में सोलर टंकी निर्माण, कूप मरम्मती, लूज बोल्डर, फार्म पोंड, डिसिटी, टीसीबी निर्माण का कार्य किया गया है। वहीं चेक डैम निर्माण के लिए प्रस्ताव विभाग को भेजा गया है। उससे जल संरक्षण को और भी प्रभावी बनाया जा सके। डीडीसी राजेश कुमार राय ने कहा कि गढ़वा जिले में चूंकि अपेक्षाकृत वर्षा कम होता है। इसलिए यहां जलछाजन के स्कीम की महत्ता बढ़ जाती है। इन योजनाओं को आत्मसात करते हुए प्लानिंग के साथ कृषि कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ड्रीप एरिगेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे जल संग्रहण के साथ-साथ फसल सिंचाई भी अच्छे से किया जा सकता है। उन्होंने इस दौरान जलछाजन समिति के सदस्यों को अच्छे कार्य करने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। वहीं कार्यशाला में उपस्थित जिला कृषि पदाधिकारी शिव शंकर कुमार, डीडीएम नाबार्ड लक्ष्मण कुमार एवं कार्यपालक अभियंता पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल प्रदीप कुमार ने भी जलछाजन को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारी दिया। कृषि बैज्ञानिक डॉ. अमरेश कुमार पांडेय ने जिले में हुए बेहतर कार्य की प्रशंसा करते हुए इसे एक मुहिम का रूप देने की बात कही। कार्यशाला में जिला परिषद अध्यक्ष शांति देवी, वन प्रमंडल पदाधिकारी दक्षिणी शशि कुमार, डीडीएम नाबार्ड लक्ष्मण कुमार, कृषि वैज्ञानिक डॉ. अमरेश कुमार पांडेय, जिला कृषि पदाधिकारी शिव शंकर प्रसाद, पीएचइडी के इइ प्रदीप कुमार, जन सहभागी केंद्र के अध्यक्ष विजय कुमार, जलछाजन समिति के सदस्य विभिन्न पंचायतों के मुखिया सहित अन्य उपस्थित थे।

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