झारखंड में 51 रुपए रोज पर नियुक्त हुआ था माली, अदालत में लड़ी कानूनी लड़ाई; अब आया सुप्रीम फैसला

Feb 17, 2026 05:47 pm ISTSourabh Jain हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्ली
share

फरवरी 2023 में अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने खंडपीठ में अपील दायर की। अपील पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा कि मोतीराम 24 वर्षों से लगातार काम कर रहे थे और नियमितीकरण के लिए आवेदन भी मांगे गए थे।

झारखंड में 51 रुपए रोज पर नियुक्त हुआ था माली, अदालत में लड़ी कानूनी लड़ाई; अब आया सुप्रीम फैसला

झारखंड के देवघर में 51 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी पर माली के रूप में काम करने वाले मोतीराम को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सेवा नियमित करने का आदेश दिया है। करीब 24 साल की सेवा और चार साल की कानूनी जंग के बाद 2026 में उन्हें यह राहत मिली। शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए यह आदेश दिया।

देवघर के बंपास टाउन निवासी मोतीराम की नियुक्ति जून 2001 में देवघर मार्केटिंग बोर्ड में दैनिक वेतनभोगी माली के रूप में हुई थी। प्रशासनिक भवन के पास लगाए गए आम के 10 पौधों की देखभाल के लिए उन्हें रखा गया था। उस समय उनकी मजदूरी 51 रुपए प्रतिदिन तय की गई थी। वर्ष 2015 में मोती राम ने मजदूरी बढ़ाने के लिए आवेदन दिया। इसमें उन्होंने बताया कि उन्हें मात्र 4346 रुपए मासिक मिलते हैं। इसके बाद तत्कालीन उपायुक्त ने मार्च 2015 में उनकी मजदूरी बढ़ाकर 7593 रुपए प्रतिमाह करने का आदेश दिया।

साल 2020 में जिला प्रशासन ने 10 वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की सेवा नियमित करने को लेकर सूचना जारी की। इसके तहत मोतीराम ने भी आवेदन दिया, लेकिन कोई निर्णय नहीं होने पर उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मार्केटिंग बोर्ड और प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया कि मोतीराम दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी थे और सेवा नियमित करने की कोई शर्त नहीं थी।

फरवरी 2023 में अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने खंडपीठ में अपील दायर की। अपील पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा कि मोतीराम 24 वर्षों से लगातार काम कर रहे थे और नियमितीकरण के लिए आवेदन भी मांगे गए थे। हाईकोर्ट की खंडपीठने उनकी सेवा नियमित करने का आदेश दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए मार्केटिंग बोर्ड सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। मामले की सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 136 के तहत अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए बोर्ड की याचिका खारिज कर दी और मोती राम की सेवा नियमित करने के आदेश को बरकरार रखा।

Sourabh Jain

लेखक के बारे में

Sourabh Jain

सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


विस्तृत बायो

परिचय और अनुभव: सौरभ जैन भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक हिस्सा हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 16 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट सेक्शन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे पिछले लगभग तीन सालों से यहां कार्यरत हैं। सौरभ का करियर टीवी मीडिया से शुरू होकर डिजिटल मीडिया की गतिशीलता तक फैला हुआ है, जो उन्हें खबरों को गहराई और सटीकता के साथ प्रस्तुत करने में सक्षम बनाता है।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि और कार्य अनुभव

सौरभ ने बैचलर ऑफ कॉमर्स की डिग्री लेने के बाद पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पोस्ट ग्रेजुएशन का कोर्स किया। इस क्षेत्र में साल 2009 से सक्रिय होने के बाद सौरभ ने पहले टीवी के क्षेत्र में अलग-अलग डेस्क पर कार्य अनुभव लिया, इस दौरान उन्होंने टिकर डेस्क से शुरुआत करने के बाद न्यूज डेस्क में कॉपी राइटिंग का अनुभव हासिल किया, इस दौरान क्षेत्रीय विषयों से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय विषयों पर खबरें लिखीं। इसके बाद उन्हें बॉलीवुड और हेल्प-लाइन डेस्क में भी काम करने का मौका मिला। हेल्प लाइन डेस्क में काम करने के दौरान उन्हें स्वास्थ्य, करियर और आम लोगों से जुड़े कई विषयों को जानने व समझने का मौका मिला।

इसके बाद साल 2016 में उन्होंने डिजिटल मीडिया की दुनिया में कदम रखा और स्पोर्ट्स डेस्क के साथ शुरुआत की। सौरभ ने अपने करियर की शुरुआत ZEE24 छत्तीसगढ़ न्यूज चैनल से की थी। इसके बाद वे IBC24 और दैनिक भास्कर जैसी संस्थाओं में भी सेवाएं दे चुके हैं। सौरभ साल 2023 से लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हुए हैं और यहां पर स्टेट डेस्क में कार्यरत हैं। सौरभ मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रहने वाले हैं और उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई और ग्रेजुएशन दोनों यहीं से किया है। इसके बाद उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में मास्टर्स की डिग्री ली है।

सौरभ जैन का मानना है कि एक पत्रकार की पहली जिम्मेदारी सही तथ्यों व आसान भाषा में पाठकों तक खबरें पहुंचाना है। इस काम में तेजी जितनी जरूरी है, सटीकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। फिर चाहे वह आम जीवन की खबरें हों, राजनीति की खबरें हों, खेल की खबरें हों या फिर चकाचौंध से भरे बॉलीवुड की खबरें हों। कोई भी खबर सही तथ्यों के साथ रीडर्स तक पहुंचनी चाहिए। हड़बड़ी में तथ्यों की पुष्टि ना होने पर गलत जानकारी पाठकों तक पहुंचने का खतरा बना रहता है। इसलिए सौरभ का मानना है कि पत्रकारिता का मतलब केवल पाठकों तक सूचना पहुंचाना ही नहीं, बल्कि सही और निष्पक्ष जानकारी पहुंचाते हुए उनकी बुद्धिमत्ता और विवेक को भी जागृत करना होता है।

और पढ़ें