ED का बड़ा खुलासा! झारखंड-बंगाल में 650 करोड़ का कोयला घोटाला

लाइव हिन्दुस्तान, रांची
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमाओं के बीच चल रही कोयला तस्करी और मनी लाउंड्रिंग के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ईडी ने इस मामले में विशेष अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है, जिसमें 650 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लाउंड्रिंग का जिक्र किया है।

ED का बड़ा खुलासा! झारखंड-बंगाल में 650 करोड़ का कोयला घोटाला

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमाओं के बीच चल रही कोयला तस्करी और मनी लाउंड्रिंग के बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ईडी ने इस मामले में विशेष अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है, जिसमें 650 करोड़ रुपये से अधिक की मनी लाउंड्रिंग का जिक्र किया है। यह काली कमाई पिछले पांच वर्षों में जबरन वसूली और गुंडा टैक्स से की गई है।

ईडी की जांच में यह बात प्रमुखता से सामने आई है कि इस सिंडिकेट का जाल झारखंड तक फैला हुआ था। ईडी के अनुसार, सिंडिकेट न केवल बंगाल के दुर्गापुर-आसनसोल क्षेत्र में सक्रिय था, बल्कि झारखंड से पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से लाए गए कोयले के कारोबार में भी संलिप्त था। झारखंड से होने वाली इस अवैध तस्करी को संरक्षण देने के लिए सिंडिकेट ने कई सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक रसूखदारों को घूस के रूप में मोटी रकम पहुंचाई थी। सिंडिकेट वैध डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) धारकों, ट्रांसपोर्टरों और खरीदारों से जबरन वसूली करता था। इसे जीटी (गुंडा टैक्स) या रंगदारी टैक्स कहा जाता था।

जीटी नहीं देने पर उठाव व परिवहन रोक दिया जाता था

ईडी ने पाया है कि यह वसूली ₹275 प्रति टन से लेकर ₹1,500 प्रति टन तक की जाती थी। यह कोयले के वास्तविक मूल्य का लगभग 20-25 प्रतिशत हिस्सा था। जो व्यापारी यह टैक्स नहीं देते थे, उन्हें कोयला उठाने और परिवहन करने से रोक दिया जाता था। इस दबाव के कारण भारी मात्रा में कोयला खदानों में ही पड़ा रहा, जिससे ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) को भी भारी वित्तीय नुकसान हुआ। उगाही की गई रकम को कई प्रोप्राइटरशिप फर्मों और मुखौटा कंपनियों के जरिए घुमाया जाता था, ताकि कमाई को वैध दिखाया जा सके।

लाला पैड के जरिए होती थी वसूली

ईडी ने जांच में पाया था कि गुंडा टैक्स व अवैध कोयला संचालन के लिए लाला पैड का इस्तेमाल किया जाता था।

आप सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर ईडी के छापे

जालंधर/चंडीगढ़। ईडी ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य अशोक मित्तल से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों पर छापेमारी की। ईडी ने यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत इन शैक्षणिक संस्थानों के कुछ विदेशी वित्तीय लेनदेन की जांच के तहत की। अधिकारियों ने बताया कि जालंधर, उसके आसपास के इलाकों और गुरुग्राम में लगभग 10 स्थानों पर तलाशी ली गई। इसमें फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी परिसर और गुरुग्राम में स्थित टेट्र कॉलेज ऑफ बिजनेस तथा मास्टर्स यूनियन कॉलेज ऑफ बिजनेस नामक दो शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। आप ने हाल ही में राघव चड्ढा को हटाकर मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का उपनेता नियुक्त किया था। वह फगवाड़ा में स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति भी हैं। उनके बेटे प्रथम मित्तल ने गुरुग्राम स्थित शिक्षण संस्थानों की स्थापना की।

Mohammad Azam

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संक्षिप्त विवरण

मोहम्मद आजम पिछले 3.5 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में बतौर कंटेंट प्रोडूसर काम कर रहे हैं।


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परिचय और अनुभव: मोहम्मद आजम पिछले तीन सालों से ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। कम समय में आजम ने पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया की बारीकियां सीखी हैं और अब भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट न्यूज टीम में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।


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आजम ने ग्रेजुएशन तक विज्ञान की पढ़ाई की है, लेकिन राजनीतिक विषयों में रुचि उनको पत्रकारिता की तरफ खींच लाई। आजम ने अपना पोस्ट ग्रेजुएशन देश के अग्रणी संस्थानों में से एक भारतीय जनसंचार संस्थान से पूरा किया। विज्ञान बैकग्राउंड होने के चलते आजम को फैक्ट आधारित पत्रकारिता करने में महारत हासिल है।


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आजम की देश की राजनीति में काफी रुचि है। आजादी के पहले से लेकर आजादी के बाद की राजनीतिक घटनाओं की कई किताबों का अध्ययन होने के चलते अच्छी समझ है। यही कारण रहा कि आजम ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत राजनीतिक बीट से की। राजनीति के साथ आजम क्राइम और सोशल मीडिया पर वायरल चल रही खबरों में भी अच्छी महारत हासिल है।


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आजम का मानना है कि पत्रकारिता जनपक्षीय होनी चाहिए। पत्रकारिता के दौरान अपनी भावनाओं को काबू में रखकर तथ्य आधारित पत्रकारिता आजम को जिम्मेदार बनाती है। पत्रकारिता में आजम तथ्य आधारित सूचनाएं पहुंचाने के साथ ही, साहित्यिक लेखन में भी महारत हासिल है।


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