अवैध कोयला कारोबार मामले में झारखंड में 30 से ज्यादा जगह पर ED की छापेमारी, 600 करोड़ की संपत्ति का पता चला

हिन्दुस्तान टाइम्स
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ईडी की छापेमारी में 200 से ज्यादा अचल संपत्तियों की जानकारी मिली, जिन्हें अपराध से हुई कमाई से खरीदे जाने का संदेह है। साथ ही इनसे जुड़ी जानकारी/डेटा, कई डिजिटल डिवाइस, और उन लोगों द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के अकाउंट्स की किताबें वगैरह भी मिलीं।

ED ने झारखंड में 30 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी करते हुए अवैध कोयला मामले में 600 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता लगाया।
ED ने झारखंड में 30 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी करते हुए अवैध कोयला मामले में 600 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता लगाया।(Handout via PTI Photo)(PTI07_16_2026_000521B)

झारखंड में अवैध कोयला कारोबार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक कथित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाल ही में 30 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की थी, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस दौरान ईडी ने कुल 600 करोड़ रुपए से ज्यादा की सम्पत्ति का पता लगाया था। जिसमें से उसने लगभग 160 करोड़ के म्यूचुअल फंड निवेश को फ्रीज कर दिया है, वहीं 1.02 करोड़ की नकदी को उसके द्वारा जब्त कर लिया गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ईडी ने यह कार्रवाई PMLA (प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट), 2002 के तहत धनबाद जिले में मुख्य आरोपी LB सिंह और उससे जुड़े लोगों और संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए की। इस दौरान ईडी ने ​​गणेश यादव, पप्पू मंडल, रोहित यादव और माधो सिंह से जुड़ी जगहों के साथ-साथ एजेंसी की नजर में आई कंपनियों के डायरेक्टरों के ठिकानों पर भी छापेमारी करते हुए अवैध कारोबार से कमाई गई संपत्ति का पता लगाया।

यह जांच तब शुरू हुई जब झारखंड पुलिस ने धनबाद और आसपास के जिलों में अवैध कोयला खनन, कोयले की चोरी और तस्करी समेत कोयला ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े रंगदारी के आरोपों में आरोपियों के खिलाफ कई FIR दर्ज कीं। ED ने कहा कि इनमें से कई मामलों में पुलिस पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। छापेमारी के दौरान बड़े पैमाने पर वित्तीय निवेश को फ्रीज किया गया और नकद जब्त किया गया। साथ ही, जांच में जांचकर्ताओं को ऐसे दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी मिले जिनसे चल रही जांच में मदद मिलने की उम्मीद है।

'फ्री प्रेस जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी ने बताया कि इस ऑपरेशन में 600 करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य की संदिग्ध संपत्ति का पता चला। शुरुआती जांच के आधार पर एजेंसी का मानना है कि आरोपियों ने कथित अवैध गतिविधियों के जरिए अपराध से भारी कमाई की और अपराध से हुई कमाई को इधर-उधर करने और उसे वैध दिखाने के लिए कई लोगों और संस्थाओं का इस्तेमाल किया। एजेंसी के अनुसार, बाद में इस पैसे को चल और अचल संपत्तियों में निवेश किया गया।

इस बारे में जानकारी देते हुए ED ने ANI को बताया, 'छापेमारी के दौरान, LB सिंह के लगभग 160 करोड़ रुपए के म्यूचुअल फंड निवेश को फ्रीज किया गया और 1.02 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी जब्त की गई। छापेमारी में बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सबूत भी जब्त किए गए, जिनमें 200 से ज्यादा अचल संपत्तियां (जिन्हें अपराध से हुई कमाई से खरीदे जाने का संदेह है) से जुड़ी जानकारी/डेटा, कई डिजिटल डिवाइस, और उन लोगों द्वारा नियंत्रित संस्थाओं के अकाउंट्स की किताबें वगैरह शामिल हैं।'

एजेंसी ने बताया कि उसने नवंबर 2025 में इन्हीं मामलों में पहले भी तलाशी ली थी। उन ऑपरेशन्स में अनिल गोयल, एलबी सिंह और जांच से जुड़े अन्य लोगों और संस्थाओं के ठिकानों की तलाशी ली गई थी। ED ने कहा कि हाल की तलाशी के दौरान इकट्ठा किए गए सबूत जिनमें फाइनेंशियल रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और 200 से ज्यादा संदिग्ध संपत्तियों से जुड़ी जानकारी शामिल हैं, ये सब मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले की चल रही जांच का हिस्सा बनेंगे।

Sourabh Jain

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Sourabh Jain

सौरभ जैन पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम में कार्यरत हैं। वह दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात से जुड़े घटनाक्रम पर खबरें और विश्लेषण लिखते हैं।


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