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हड़ताल पर रहे बैंक कर्मचारी, ग्राहक हलकान

दुमका जिले में बैंककर्मियों की हड़ताल असरदार रही। सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों में दिन भर ताले लटके रहे। हड़ताल के कारण दुमका में करीब 50 करोड़ का लेनदेन ठप रहा, जिसका असर ग्राहक से लेकर कारोबारियों पर भी पड़ा।

बैंककर्मियों की दो दिवसीय हड़ताल यूनाईटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर किया गया। पहले दिन एसबीआई की मुख्य शाखा के सामने बैंककर्मियों ने प्रदर्शन किया। सरकार के नीतियों के विरोध में नारे लगाए गए। कर्मियों ने वेतन वृद्धि सहित अन्य सेवा शर्तो में सुधार करने की मांग को लेकर हड़ताल की है। जिले में एसबीआई की 45 शाखाएं है। सभी में दिन भर ताले लटके रहे। कोई कामकाज नहीं हुआ। वहीं इलाहाबाद बैंक, सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा सहित सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों में ताला लटका रहा। कई निजी बैंकों को भी हड़ताली बैंककर्मियों ने बंद करा दिया।

निराश लौटे ग्राहक: हड़ताल के कारण वैसे ग्राहकों को निराश लौटना पड़ा, जिन्हें बैंक हड़ताल की पहले से जानकारी नहीं थी। इसमें अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र के ग्राहक थे। ऐसे कई ग्राहक कड़ी धूप में बैंक आ गए। बैंक आने पर उन्हें हड़ताल की जानकारी मिली। इस कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। गुरुवार को भी बैंकों में ताला लटका रहेगा।

दो प्रतिशत वेतनवृद्धि का ऑफर अनुचित: एनसीबीई व एसबीआई स्टाफ एसोसिएशन, झारखंड के सहायक महासचिव रवि प्रताप ने बताया कि सरकार की बैंक विरोधी नीतियों और लंबित वेतनमान सहित कई मांगों को लेकर हड़ताल की गई है। सहायक महासचिव ने बताया कि नवम्बर माह-2017 से वेतनवृद्धि बैंक कर्मियों का लंबित है।

2 प्रतिशत वेतनवृद्धि का सरकार ने ऑफर दिया है,जो अनुचित है। पिछले साल बैंक कर्मचारियों का 15 प्रतिशत वेतनवृद्धि की गई थी। इस बार दो प्रतिशत वेतन वृद्धि से बैंक कर्मियों में रोष है। महासचिव ने बताया कि वेतन समझौता जल्द करने,वेतन में पर्याप्त वृद्धि एवं सेवा शर्तो में बेहतरी करने एवं वेतन समझौते में स्केल 7 तक के अधिकारियों को सम्मिलित किए जाने की मांग की।

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