महर्षि मेंही आश्रम जोगिया में शुरू हुआ दो दिवसीय संतमत सत्संग

Newswrap हिन्दुस्तान, दुमका
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रामगढ़ प्रखंड के जोगिया गांव में महर्षि मेंही आश्रम में दो दिवसीय संतमत सत्संग का आयोजन हुआ। इसमें स्वामी निर्मलानंद जी, स्वामी कमलानंद जी और अन्य साधु महात्माओं ने भाग लिया। सत्संग में श्रद्धालुओं को ज्ञान और भक्ति का महत्व बताया गया। कार्यक्रम में आध्यात्मिक भजनों की प्रस्तुति भी की गई।

महर्षि मेंही आश्रम जोगिया में शुरू हुआ दो दिवसीय संतमत सत्संग

रामगढ़, प्रतिनिधि। रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत जोगिया गांव में स्थित महर्षि मेंही आश्रम में रविवार को दो दिवसीय संतमत सत्संग का विराट आयोजन किया गया। आयोजन को लेकर सिद्धपीठ कुप्पाघाट भागलपुर से स्वामी निर्मलानंद जी महाराज, स्वामी महेंद्र बाबा, स्वामी कमलानंद महाराज,स्वामी भजनानंद बाबा, स्वामी परमानंद बाबा सहित अन्य साधु महात्माओं का पदार्पण रामगढ़ के जोगिया गांव स्थित महर्षि मेंही आश्रम में हुआ है। रविवार को सत्संग का आयोजन प्रातः 6 बजे से लेकर 11 बजे तक तथा दोपहर 2 बजे से संध्या 5 बजे तक किया गया। सत्संग के पहले दिन प्रवचनकर्ता स्वामी निर्मलानंद जी महाराज ने सत्संग की महिमा बताते हुए कहा कि सत्संग में आने वाले ही परमात्मा के कृपापात्र बनते हैं।

सत्संग से ही जीव को वह ज्ञान प्राप्त होता है जिससे इस संसार के दुखों से छूट कर अंनत सुख को प्राप्त कर सकता हैं। सत्संग-भजन करने वाले को जन्म मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। इसके लिए सच्चे सदगुरू की शरण मे जा कर उनके बताए मार्ग पर चलना चाहिए। सच्चे सदगुरू परमात्मा से मिला देने वाले होते हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा की प्राप्ति अपने अंदर में होगी। इसके लिए गुरू से युक्ति जानकर भक्ति करनी चाहिए। स्वामी कमलानंद जी महाराज ने कहा कि सत्संग मौत के भय से बचाता है। इसलिए सत्संग अवश्य करना चाहिए। इससे सभी सुखों की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि मानव शरीर की सार्थकता को समझकर व्यक्ति को साधन-भजन कर मोक्ष प्राप्त करना चाहिए। सत्संग को संबोधित करते हुए स्वामी निर्मलानंद जी महाराज ने संत कबीर की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस प्रकार रामायण में श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को वैतरणी पार कराने के लिए तीर्थ यात्रा पर निकले थे, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को किसी भी भगवान की आराधना से पहले माता-पिता और गुरु की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि घर में मौजूद ईश्वर स्वरूप माता-पिता और गुरु को छोड़कर लोग मंदिर-मस्जिद के चक्कर लगाते रहते हैं, जबकि सच्ची मुक्ति इससे संभव नहीं है। संतमत-सत्संग में दूर दराज से श्रद्धालु पहुंचे थे। जिन्होंने अध्यात्म की गंगा में डुबकी लगाई। कार्यक्रम में आध्यात्मिक भजनों की भी प्रस्तुति की गई। वहीं सत्संग का समापन सोमवार को होगा। कार्यक्रम में संतों के भजनों पर श्रोता झूमते रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजन समिति का प्रमुख योगदान रहा।

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