वेतन सहित अन्य मांगों को लेकर अनुबंध व आउटसोर्सिंग कर्मियों ने दिया एक दिवसीय धरना
-झारखण्ड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले संघ के आरएचएम स्वास्थ्य विभाग के अनुबंध कर्मियों एवं आउटसोर्सिंग कर्मियों ने दिया धरना

राजकुमार कुशवाहा दुमका। प्रतिनिधि
झारखण्ड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले संघ के आरएचएम स्वास्थ्य विभाग के अनुबंध कर्मियों एवं आउटसोर्सिंग कर्मियों ने वेतन सहित अन्य मांगों को लेकर शुक्रवार को सिविल सर्जन कार्यालय दुमका के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया। धरना के बाद कर्मियों ने सिविल सर्जन को अपनी 17 सूत्री मांग पत्र सौंपा। धरना कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए महासंघ के जिला मंत्री राजीव नयन तिवारी ने कहा कि अनुबंध कर्मियों को तीन से चार महीने और आउटसोर्सिंग कर्मियों को सात से आठ माह से लगातार मानदेय, दैनिक पारिश्रमिक, वेतनादि नहीं मिलने के कारण परिवार के समक्ष भूखमरी, बच्चों की पढ़ाई, बीमारी का इलाज की समस्या उत्पन्न हो गयी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कर्मी भूखे-प्यासे अपनी जबावदेही को निरन्तर निर्वहन करते आ रहे हैं। इससे स्वास्थ्य कर्मियों में काफी आक्रोश है। इसके साथ कई मांगों को भी साथ रखा गया। झारखण्ड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, दुमका के जिला सचिव कैलाश प्रसाद साह ने धरना कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि अगर हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जाता है तो आगे उग्र आंदोलन किया जायेगा। इस धरना में महासंघ के जिला मंत्री राजीव नयन तिवारी, चिकित्सा संघ के अध्यक्ष तपन कुमार ठाकुर, कोषाध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार, जरमुंडी प्रखंड मंत्री मनोज कुमार, विनीता कुमारी, वरुण कुमार, सुप्रियो साहा, सुनाली रुज, मोनिका मरांडी, शांति हेम्ब्रोम, सरोज भगत, प्रिसिला सोरेन के साथ काफी संख्या में कर्मी उपस्थित थे。
स्वास्थ्य कर्मियों की क्या है मांगें
स्व. रेखा कुमारी अनुबंध एएनएम, स्वास्थ्य उपकेन्द्र मोहडा, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जामताड़ा, जिला जामताड़ा के आश्रित को तत्काल 10 (दस) लाख रूपये का मुआवजा दिया जाय।
स्व. रेखा कुमारी के वेतन से ही उनके परिवार का भरण-पोषण होता था। मानवीय दृष्टिकोण से उनके पति को अनुकम्पा के आधार पर स्वास्थ्य विभाग के अन्तर्गत नौकरी दिया जाय।
समय पर आवंटन के वावजूद वेतनादि के भुगतान नहीं करने वाले पदाधिकारी/कर्मचारी पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
वित्तीय वर्ष 2025-26 का 8 प्रतिशत वेतन वृद्धि मानदेय में जोड़ते हुए बकाया का भुगतान करने का निदेश सभी संबंधित को दिया जाय।
साथ ही योजनाओं में बकाया प्रोत्साहन राशि का 15 दिनों के अंदर भुगतान कराया जाय।
माह की 5 तारीख तक मानदेय का भुगतान करने की व्यवस्था किया जाय। विलम्ब से भुगतान करने वाले पर कार्रवाई किया जाय।
साथ ही अनुबंध कर्मियों एवं अन्य कर्मियों को प्रखण्ड/जिला स्तर पर शोषण /अनायस स्थानान्तरण, प्रतिनियुक्ति पर रोक लगायी जाय।
सभी स्वास्थ्य उपकेन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर बायोमेट्रिक डिवाईस एवं नेटवर्क की व्यवस्था करायी जाय। बायोमेट्रिक उपस्थिति में शिथिलता बरती जाय। अत्यधिक कार्यों के कारण समय पर उपस्थिति बनाने में कठिनाई होती है। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपस्थिति पंजी का संधारण करायी जाय।
समान काम का समान वेतन के सिद्वान्त पर मंहगाई को देखते हुए नये सिरे से मानदेय/वेतनादि का निर्धारण किया जाय।
सभी अनुबंध कर्मियों के लिये स्वास्थ्य बीमा योजना लागू किया जाय।
भविष्य निधि निदेशालय झारखण्ड रॉची द्वारा निर्गत पत्र के आलोक में सभी अनुबंध कर्मियों का ई०पी०एफ० की कटौती हेतु पत्र निर्गত किया जाय।
सरकार एवं कर्मचारियों के बीच शोषक के रूप में कार्य कर रहे आउटसोर्सिंग एजेन्सी व्यवस्था को समाप्त किया जाय।
आउटसोर्सिंग पर कार्य कर रहे कर्मियों को आईपीएचएस० के अनुसार निर्धारित रिक्ति के विरूद्ध तत्काल अनुबंधित कर्मी के रूप में समायोजित किया जाय।
आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मियों को श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग, झारखण्ड सरकार द्वारा निर्धारित अधतन दैनिक मजदूरी के दर से भुगतान करने हेतु एजेंसियों को निदेश दिया जाय एवं उनकी समीक्षा हेतु सभी सिविल सर्जन, झारखण्ड को पत्र निर्गत किया जाय।
वर्तमान में लंबित आउटसोर्सिंग पर कार्यरत कर्मियों का बकाया पारिश्रमिक का एकमुश्त भुगतान हेतु एजेंसियों को आदेश दिया जाय।
आउटसोर्सिंग कर्मियों के पारिश्रमिक से ईसीआई के रूप में राशि की कटौती तो की जाती है, परन्तु उक्त से संबंधित कार्ड या दस्तावेज किसी भी कर्मियों को उपलब्ध नहीं कराया जाता है। फलस्वरूप उक्त के अनुसार कर्मियों को चिकित्सा का लाभ नहीं मिल पाता है। इस हेतु एजेंसियों को पत्र निर्गत किया जाय।
कर्मियों के पारिश्रमिक से नियमित ई०पी०एफ० कटौती तो की जाती है, परन्तु संबंधित के ईपीएफ खाता में राशि कम या जमा नहीं किया जाता है। इसकी समीक्षा करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाय।
नियमित एवं अनुबंध कर्मियों की तरह आउटसोर्सिंग के तहत् कार्यरत महिला कर्मियों को भी विशेष अवकाश एवं मातृत्व अवकाश के साथ-साथ अन्य अवकाश की सुविधा प्रदान की जाय।
आउटसोर्सिंग कर्मियों से नियमानुसार महीने में 26 दिन ही कार्य लिया जाता है, परन्तु अधिकांश कर्मियों से (पूर्ण माह) का कार्य लिया जाता है, परन्तु अतिरिक्त किये गये 4 दिनों के कार्य के बदले कर्मियों को भुगतान नहीं किया जाता है। इसकी समीक्षा करते हुए पूर्व से ही भुगतान की कार्रवाई सुनिश्चित करायी जाय।
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फोटो-19दुमका-203,204, कैप्सन- शुक्रवार को सिविल सर्जन कार्यलय में एक दिवसीय धरना पर बैठे अनुबंध और आउट शोरसिंग कर्मी
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