पूर्णाहुति के साथ मयूरनाथ में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का हुआ समापन
रामगढ़, प्रतिनिधि।पूर्णाहुति के साथ मयूरनाथ में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का हुआ समापनपूर्णाहुति के साथ मयूरनाथ में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्

रामगढ़, प्रतिनिधि।मयूरनाथ में राधा कृष्ण मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-यज्ञ और पूर्णाहुति के साथ अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिभाव से शनिवार को संपन्न हो गया। पूर्णाहुति के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने यज्ञ में पूर्णाहुति दी। पूर्णाहुति के बाद आरती हुई। मौके पर लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। अंतिम दिन हवन कुंड में पूर्णाहुति और विशेष पूजा के साथ भागवत कथा का समापन हुआ। कथा वाचिका महामंडलेश्वर स्वामी मां ध्यान मूर्ति ने कहा कि नित्य भगवान नाम का स्मरण करना चाहिए, कलयुग में भगवान नाम का स्मरण ही कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता का महत्व समझाते हुए कहा कि भगवत गीता में मनुष्य के जीवन का सर्वाधिक महत्वपूर्ण सार समाहित है। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान का वह भंडार है जो आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार करवाकर उसके बैकुंठ ले जाने का मार्ग का प्रशस्त करती है। कथा की सार्थकता तभी है जब इसे हम अपने जीवन में धारण कर निरंतर हरि स्मरण करते हुए जीवन को आनन्दमय और मंगलमय बनाकर आत्मकल्याण करें। आगे कथा व्यास ने कहा कि जब सौभाग्य का उदय होता है, तब ही भागवत कथा सुनने को मिलती है। श्रीमद्भागवत कथा श्रवण और माता-पिता की सेवा से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक और आध्यात्मिक विकास होता है। सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है।कहा कथा कल्पवृक्ष के समान है। श्रीमद्भागवत मोक्ष दायिनी है। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई। ईश्वर की लीला, ईश्वर प्रेम, माता पिता की सेवा आदि का मर्म भागवत कथा के माध्यम से बताया। वेद मन्त्रों की ध्वनि और यज्ञ की अग्नि से वातावरण भक्तिमय हो गया। भक्तों ने आहुतियां डालते हुए भगवान श्री कृष्ण से सुख समृद्धि और शांति की कामना की। पूर्णाहुति के दौरान हर कोई भाव विभोर हो उठा। हवन पूर्णाहुति के पश्चात भंडारे की व्यवस्था की गई। भंडारे मे सकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। मौके पर समस्त ग्रामवासियों का सहयोग रहा। मुख्य यजमान के रुप मे जयप्रकाश राय तथा उनकी धर्मपत्नी थीं।फोटो-18दुमका-210, कैप्सन- रामगढ़ में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में हवन पूर्णाहुति में शामिल श्रद्धालु
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