
संयुक्त किसान मोर्चा व केन्द्रीय ट्रेड युनियन मंच ने किया प्रदर्शन
दुमका में संयुक्त किसान मोर्चा और केन्द्रीय ट्रेड यूनियन मंच ने विभिन्न मांगों को लेकर उपायुक्त कार्यालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। किसान सभा के संयुक्त सचिव एहतेशाम अहमद ने कहा कि 736 शहीदों के बलिदान से तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने में मदद मिली। प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपा गया।
दुमका, प्रतिनिधि। संयुक्त किसान मोर्चा व केन्द्रीय ट्रेड युनियन मंच दुमका की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार को उपायुक्त कार्यालाय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए किसान सभा के संयुक्त सचिव एहतेशाम अहमद ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर जो ऐतिहासिक किसान संघर्ष की शुरूवात किया गया था और संयुक्त ट्रेड युनियनों का सक्रिय समर्थन प्राप्त था, 26 नवम्बर को इस संघर्ष के पांच वर्ष पूरे होने जा रहा है। कहा इस संघर्ष में 736 शहीदों के बलिदान और 380 दिनों के लम्बे संघर्ष ने तीनों कौरपोरेट परस्त और जनविरोधी कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए मजबुर कर दिया था।

कहा कि आज भारत के किसान पूरी तरह से बर्बादी के कगार पर है। प्रदर्शन के बाद उपायुक्त के माध्यम से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को मांग पत्र सौंपा गया। प्रदर्शन में मुख्य रूप से एहतेशाम अहमद, अखिलेश कुमार झा, देवी सिंह पहाडिया, सनातन देहरी, सुभाष हेम्ब्रम, गोविन्द पुजहर, पीटर हेम्ब्रम, भागवत राय, जनार्धन देहरी सहित काफी संख्या में संयुक्त किसान मोर्चा व केन्द्रीय ट्रैड युनियन मंच के सदस्य शामिल थे। क्या हैं मांग: सी2,50 प्रतिशत की दर पर खरीद की गारंटी के साथ एमएसपी के लिए तुरंत एक कानून बनाया जाए, बिजली बिल 2025 वापस लिया जाए, बिजली दरों पर वृद्धि को रोका जाय, खेती के लिए मुफ्त बिजली, सभो गरीबों को 300 यूनिट मुफ्त और प्रीपेड स्मार्ट गीटर बंद किया जाए, किसानों के आत्म हत्या रोकने के लिए सभी किसानों के सभी कर्ज माफ किया जाए, माईक्रोफायनेंस कम्पनिओं को नियंत्रित किया जाए, श्रम संहिताओं को निरस्त किया जाए, न्यूनतम वेतन के अधिकार की रक्षा, भारत पर 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरीफ भारत की सम्प्रभुता का उल्लंघन मानते हुए सख्त जबाब दिया जाए सहित अन्य मांग शामिल हैं।

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