DA Image
हिंदी न्यूज़ › झारखंड › दुमका › हिन्दी साहित्य में भावों व विचारों की ही प्रधानता है:डॉ.राम वरण चौधरी
दुमका

हिन्दी साहित्य में भावों व विचारों की ही प्रधानता है:डॉ.राम वरण चौधरी

हिन्दुस्तान टीम,दुमकाPublished By: Newswrap
Thu, 23 Sep 2021 04:32 AM
हिन्दी साहित्य में भावों व विचारों की ही प्रधानता है:डॉ.राम वरण चौधरी

दुमका। हिंदी पखवारा कार्यक्रम के तहत ‘हिन्दी को सार्वजनिन बनाने में साहित्यकारों की भूमिका विषय पर क्वार्टर पाड़ा, दुमका स्थित सतीश चौरा में प्रबुद्ध कवियों एवं साहित्यकारों की एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विचार गोष्ठी कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ रामवरण चौधरी ने की। इस अवसर पर डॉ.चौधरी ने कहा कि हिन्दी साहित्य में भावों व विचारों की ही प्रधानता है। रचना में अभिव्यक्ति सरल होनी चाहिए। वरिष्ठ साहित्यकार शंभूनाथ मिस्त्री ने कहा कि भाषाई अभिव्यंजना और संप्रेषणीयता साहित्य को सार्वजनिन बनाता है। डॉ चतुर्भुज नारायण मिश्र ने कहा कि विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों व विद्यालयों में प्रयुक्त होने वाली भाषा में व्याकरण को दरकिनार करना बिल्कुल ही उचित नहीं है। भाषा ऐसी होनी चाहिए जिसका प्रभाव जन-जन तक हो। गीतकार कमलाकांत प्रसाद सिन्हा ने साहित्य के माध्यम से वैचारिक मंच के सृजन पर जोर दिया। युवा कवि अशोक सिंह ने कहा कि विशुद्ध हिंदी वाले आग्रह से बचना चाहिए। वरिष्ठ साहित्यकार अरुण कुमार सिन्हा ने जहां एक और लुगदी साहित्य के विभिन्न आयामों पर अपनी सारगर्भित बातें रखी, वहीं अंजनी शरण, दुर्गेश चौधरी, ऋतुराज कश्यप ने भी हिंदी साहित्य में सरल व क्लिष्ट भाषा के बीच तुलनात्मक महत्व व समीचीन रूप से स्वीकार्य शब्दों के प्रयोग पर पूरी प्रमुखता के साथ अपने अपने विचार रखे।

कवि सम्मेलन

विचार गोष्ठी के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। राजीव नयन तिवारी, अमरेन्द्र सुमन, केशव सिन्हा, रोहित अम्बष्ट, उत्तम कुमार दे, विष्णु देव महतो अलबेला व अनुराग कुमार ने अपनी अपनी कविताओं के माध्यम से विचार गोष्ठी में उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच संचालन विश्वजीत राहा और धन्यवाद ज्ञापन मंच के सचिव कुंदन कुमार झा ने किया।

संबंधित खबरें