बैशाख मास : बाबा बासुकीनाथ का पांच घड़ों से हो रहा है निरंतर अभिषेक

Newswrap हिन्दुस्तान, दुमका
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जरमुंडी, प्रतिनिधि। बैशाख मास : बाबा बासुकीनाथ का पांच घड़ों से हो रहा है निरंतर अभिषेक बैशाख मास : बाबा बासुकीनाथ का पांच घड़ों से हो रहा है निरंतर

बैशाख मास : बाबा बासुकीनाथ का पांच घड़ों से हो रहा है निरंतर अभिषेक

जरमुंडी, प्रतिनिधि। बैशाख मास में संसार के कल्याणार्थ जीव जगतमय सर्वात्मा शिव का निरंतर जलाभिषेक किया जा रहा है। सौर बैशाख मास में जब सूर्य अपने सर्वोच्च (मेष) राशि में गोचर कर रहे हैं, तब भीषण चिलचिलाती धूप की तपिश से सृष्टि चहुंओर त्राहिमाम कर रही होती है। सूर्य के इस भीषण ताप से संसार के जीवों के कल्याणार्थ जीव जगतमय सर्वात्मा शिव का निरंतर जलाभिषेक किया जाना कल्याणकारी रहा है। बैशाख मास में धरती पर सूर्य की किरणें सबसे तेज पड़ती हैं, ऐसे में प्राणियों की रक्षा के लिए एकमात्र जल ही जीवन होता है, शीतल जल से जीव जगत की रक्षा होती है।

संसारमय सर्वात्मा शिव को शीतल जल से पूरे मास पर्यंत निरंतर अभिषिक्त करने की परंपरा अखिल संसार का सार्वभौम कल्याण सिद्ध करता है। बाबा बासुकीनाथ मंदिर में नागेश ज्योतिर्लिंग के ऊपर सौर बैशाख मास पर्यंत मास के प्रारंभ से ही प्रतिदिन जल से परिपूर्ण मिट्टी के पांच घड़े लगाए जाते हैं। मिट्टी के यह, पांच घड़े बाबा बासुकीनाथ के पुराने समय से सेवारत रहे यहां के स्थानीय पांच परिवारों का द्योतक भी है, जो बैशाख मास में संसार रूपी सर्वात्मा शिव के प्रति पीढ़ी दर पीढ़ी अपनी आस्था और भूमिका तय करते आ रहे हैं। इनमें बासुकीनाथ के परिहार पंडा परिवार, गोस्वामी पंडा परिवार, पांडेय परिवार, फुलधरिया परिवार और सरकारी पुजारी शामिल हैं। बाबा बासुकीनाथ के ज्योतिर्मय नागेश शिवलिंग के ऊपर पांच मिट्टी के घड़ों (गलंतिका) से निरंतर जलाभिषेक करने की प्राचीन परंपरा है। भीषण गर्मी में महादेव को शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से शिवलिंग के ऊपर रखे पांच घड़ों से अनवरत बूंद-बूंद जल निरंतर गिरता है। यह अनूठा अनुष्ठान पूरे एक महीने तक यूं ही चलता रहता है। इसे बैशाखी जलधारा अनुष्ठान भी कहा जाता है। वैशाख मास के प्रारंभ से ही नियम निष्ठा पूर्वक पांच परिवारों के प्रतिनिधि दिवाकालीन विश्राम पूजा के दौरान शिवगंगा से पवित्र जल भरकर पांच घड़ों को शिवलिंग के ऊपर लगाते हैं। यह क्रम एक मास पर्यंत निरंतर चलता रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अनुष्ठान से महादेव प्रसन्न होकर संसार का कल्याण करते हैं। वैशाख मास में बाबा बासुकीनाथ को पवित्र जल से अभिषेक करने वाले भक्तों को सुख, शांति और आरोग्यता का आशीर्वाद देते हैं। बाबा बासुकीनाथ को वैशाख मास में शीतल जल से अभिषेक करने के पीछे एक मान्यता यह भी है कि समुद्र मंथन में हलाहल विष पीने से वह नीलकंठ कहलाए। इस घटना के बाद हलाहल विष के प्रभाव से उनका शरीर दग्ध होने लगा था, घटनाक्रम के दौरान भगवती तारा ने भोलेनाथ को अपना दुग्ध पान कराकर उनकी रक्षा की थी। इस घटना के बाद भगवान नीलकंठ को जलाभिषेक किया जाना अत्यंत प्रिय लगता है। इसलिए मधुमास श्रावण में श्रद्धालु पैदल गंगाजल लाकर उनका अभिषेक करते हैं और वैशाख मास में सूर्य के भीषण ताप से अकुलाए संसार रूपी शिव को निरंतर अभिषिक्त किया जाता है। इसलिए शिवलिंग के ऊपर पांच मिट्टी के कलश रखे जाते है। वैशाख मास में प्याऊ लगाना पशु पक्षियों के लिए खाना और पीने के लिए पानी की व्यवस्था करना आध्यात्मिक दृष्टिकोण से काफी शुभ और पुण्यदायक कहा गया है। इस समय श्रद्धालु अपने घर के छतों के ऊपर पक्षियों के लिए पानी का कटोरा रखते हैं।फोटो संख्या-02-बाबा बासुकीनाथ के ज्योतिर्मय नागेश शिवलिंग के ऊपर रखने के लिए शिवगंगा में जल भरते फोटो संख्या-03-बाबा बासुकीनाथ के ज्योतिर्मय नागेश शिवलिंग के ऊपर रखे पांच मिट्टी के घड़ेफोटो संख्या-04-बाबा बासुकीनाथ के ज्योतिर्मय नागेश शिवलिंग

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