टेंडर के बाद भी जमीन के अभाव में जलमीनार का लटका निर्माण

Newswrap हिन्दुस्तान, धनबाद
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धनबाद में जलमीनार का निर्माण टेंडर के बावजूद जमीन की कमी के कारण लटका हुआ है। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को जमीन की एनओसी नहीं मिल रही है, जिससे काम ठप पड़ा है। विभाग ने छह स्थानों पर जलमीनार बनाने की योजना बनाई है, लेकिन स्थानीय विरोध और एनओसी की कमी से परियोजना में देरी हो रही है।

टेंडर के बाद भी जमीन के अभाव में जलमीनार का लटका निर्माण

धनबाद, कार्यालय संवाददाता। टेंडर के बाद भी जमीन के अभाव में जलमीनार का निर्माण लटका है। इसके लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को जमीन नहीं मिल रही है। इस कारण काम ठप पड़ा है, जबकि विभाग ने अक्तबूर में ही टेंडर निकाल कर ठेकेदारों को काम आवंटित कर दिया है। एक साल में जलमीनार का निर्माण पूरा करना था। इस बाबत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता रंजीत ठाकुर का कहना है कि नगर निगम और अपर समाहर्ता को पत्र लिखा गया है। जमीन की एनओसी मिलने के बाद निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। छह जगहों पर बनेगी जलमीनार: विभागीय कर्मियों का कहना है कि डीएमएफटी फंड से छह जगहों पर जलमीनार बनेगी।

पांडरपाला भरत चौक और कुसुम विहार में जलमीनार का निर्माण शुरू कर दिया गया है, जबकि जमीन की एनओसी कहीं से नहीं मिली है। जमीन की एनओसी जारी होने के बाद ही टेंडर कराने का प्रावधान है। इसके बावजूद अधिकारियों ने बिना जमीन की एनओसी लिए टेंडर निकाल दिया। साथ ही ठेकेदारों को काम भी आवंटित कर दिया गया। इस कारण योजना समय पर पूरा नहीं हो पाती है।सरकारी जमीन चिह्नित कर सीओ ने दी रिपोर्ट: सहायक अभियंता कुमार समेंद्र मल्लिक का कहना है कि 20 करोड़ 22 लाख की लागत से जलमीनार बनेगी। जलमीनार बनाने के लिए अपर समाहर्ता और नगर निगम को जमीन की एनओसी देने के लिए पत्र लिखा गया था। इस संबंध में विभाग ने सीओ को पत्र लिखकर जमीन चिह्नित कर रिपोर्ट मांगी थी। सीओ की रिपोर्ट के अनुसार चीरागोड़ा जलमीनार के समीप, धैया मंडल बस्ती के दुर्गा मंदिर स्थित, कुसुम विहार, मटकुरिया जलमीनार स्थित निगम का जहां पार्क बनाया जा रहा था, वहां सरकारी जमीन चिह्नित की गई है। सरायढेला साइबर थाना के समीप और पांडरपाला भरत चौक के पास जमीन दी गई, लेकिन जमीन की एनओसी नहीं दी गई। सिर्फ जमीन चिह्नित कर दी गई है। कुसुम विहार व पांडरपाला भरत चौक के पास जो जलमीनार का काम शुरू किया गया है, वहां के स्थानीय लोगों के सहयोग से निर्माण हो रहा है। इधर, बिना एनओसी के काम शुरू होने पर कई जगहों पर स्थानीय लोगों का विरोध शुरू हो गया है।

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